Lucknow में कूरियर के जरिए पहुंच रही हैं नकली दवाएं, FSDA ने पकड़ी लाखों की खेप; कई लोग गिरफ्तार
Lucknow: राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं का कारोबार तेजी से फैल रहा है और अब कूरियर सेवाएं इन दवाओं की तस्करी का सबसे बड़ा जरिया बन गई हैं। बाहरी राज्यों से कूरियर के जरिए नकली दवाएं शहर में पहुंचाई जा रही हैं, जिससे आम मरीज
Lucknow: राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं का कारोबार तेजी से फैल रहा है और अब कूरियर सेवाएं इन दवाओं की तस्करी का सबसे बड़ा जरिया बन गई हैं। बाहरी राज्यों से कूरियर के जरिए नकली दवाएं शहर में पहुंचाई जा रही हैं, जिससे आम मरीजों की जान को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।
17 जुलाई 2026 को BKT पुलिस और FSDA ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया, जिसमें 2,157 संदिग्ध और नकली दवाओं की बोतलें पकड़ी गईं। इन दवाओं की कीमत करीब 4.37 लाख रुपये बताई गई है और इस मामले में भूपेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पकड़ी गई खेप में Rubired, ALKASOL Sugar Free और Mucaine Gel जैसी दवाएं शामिल थीं। कंपनी के प्रतिनिधियों ने जांच के बाद पुष्टि की कि इन दवाओं की लेबलिंग, प्रिंटिंग और लोगो में गड़बड़ी थी, जिससे इनका नकली होना साफ हो गया।
नकली दवाओं का यह खेल सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है। 9 जुलाई को FSDA ने लखनऊ की 25 दवा कंपनियों पर छापा मारा, जहां 26.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं मिलीं। इस कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और 12 कंपनियों का काम बंद कराया गया। वहीं 8 जुलाई को आलमबाग बस स्टेशन के पास से विमल कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास 1.6 लाख रुपये की नकली एलोपैथिक दवाएं जैसे Chymoral Forte और Gudcef Plus थीं। विमल की सूचना पर वाराणसी में छापेमारी की गई, जहां संदीप श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर करीब 25 लाख रुपये की दवाएं बरामद की गईं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आगरा में भी एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। वहां सरकारी अस्पतालों की जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग और अवैध री-लेबलिंग का खेल चल रहा था। वहां 13 फर्मों पर छापेमारी के बाद करोड़ों की नकली दवाएं जब्त की गईं और 58 थोक लाइसेंस निलंबित कर दिए गए।
डॉक्टर विवेक श्रीवास्तव और अन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नकली दवाएं मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। इनमें सही मात्रा में एक्टिव इंग्रीडिएंट्स नहीं होते, जिससे बीमारी ठीक होने के बजाय बढ़ सकती है और संक्रमण का खतरा भी रहता है। अधिकारियों का कहना है कि रिटेल दुकानों तक पहुंचने के बाद असली और नकली दवा में फर्क करना मुश्किल होता है, इसलिए वे अब सप्लाई चेन और उत्पादन के केंद्रों पर कार्रवाई कर रहे हैं।