Lucknow में अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाला फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया, 119 लोग गिरफ्तार

Lucknow: राजधानी के विभूति खंड इलाके में पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह गैंग अमेरिका के लोगों को अपना शिकार बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल से संचालित हो रहे इ

Lucknow: राजधानी के विभूति खंड इलाके में पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह गैंग अमेरिका के लोगों को अपना शिकार बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल से संचालित हो रहे इस नेटवर्क ने साल भर में करीब 150 से 200 करोड़ रुपये कमाए थे।

लखनऊ पुलिस की साइबर सेल और साइबर थाने की टीम ने 1 जुलाई 2026 को इस ऑफिस में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में कुल 119 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें 3 जुलाई को जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार लोगों में दो ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक यह सेंटर ‘सोलारिस सॉल्यूशंस’ के नाम से चल रहा था और पिछले छह महीने से सक्रिय था।

ठगी करने का तरीका बहुत शातिर था। गिरोह के सदस्य अमेरिकी नागरिकों को फर्जी मैसेज भेजते थे कि उनके Amazon, Apple या Samsung अकाउंट से ड्रग तस्करी या आतंकवाद जैसी गलत गतिविधियों में शामिल होने का पता चला है। इसके बाद उन्हें एक टोल-फ्री नंबर पर कॉल करने को कहा जाता था। कॉल उठाने पर टेलीकॉलर खुद को माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक या अमेरिकी सरकारी अधिकारी बताकर डराते थे। वे लोगों को गिरफ्तारी या बैंक खाता ब्लॉक होने का डर दिखाकर गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे वसूलते थे।

बरामद सामान संख्या/विवरण
लैपटॉप 103
मोबाइल फोन 177-178
हेडफोन 116
अन्य उपकरण राउटर, बायोमेट्रिक मशीन, Eyebeam Dialer
दस्तावेज विदेशी नागरिकों का डेटा और फर्जी सरकारी कागजात

इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना विनीत शर्मा अभी फरार है, जिस पर पुलिस ने 25,000 रुपये का इनाम रखा है। पुलिस उसकी एक महिला मित्र की भी तलाश कर रही है जो पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। कॉल सेंटर के कर्मचारियों को 30 से 40 हजार रुपये वेतन और ठगी की रकम पर 10 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।

पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर और अन्य अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसियां भी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बिल्डिंग किराए पर लेते समय आरोपियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था या नहीं। इस पूरे मामले की रिपोर्ट विदेश मंत्रालय को भेजी जाएगी और बरामद उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है।