Lucknow में कर्मचारी संगठनों का हल्लाबोल, 8वें वेतन आयोग की बैठक से बाहर रखने पर जताया विरोध

Lucknow: उत्तर प्रदेश के अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने सरकार और आठवें वेतन आयोग के रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। 21 जून 2026 को लखनऊ के प्रेस क्लब में एक संयुक्त बैठक और प्रेस वार्ता हुई, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी लंबित

Lucknow: उत्तर प्रदेश के अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने सरकार और आठवें वेतन आयोग के रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। 21 जून 2026 को लखनऊ के प्रेस क्लब में एक संयुक्त बैठक और प्रेस वार्ता हुई, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। संगठनों का आरोप है कि सरकार उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है।

विवाद का मुख्य कारण यह है कि 22 और 23 जून को लखनऊ में आठवें वेतन आयोग की एक हाई लेवल टीम बैठक करने आ रही है। इस टीम को राज्य के कर्मचारी संगठनों, शिक्षकों और बिजली कर्मियों के साथ चर्चा करनी थी, लेकिन उन्हें इन बैठकों में शामिल नहीं किया गया। कर्मचारी संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि वेतन आयोग की सिफारिशों का पूरा वित्तीय बोझ राज्यों को उठाना पड़ता है, ऐसे में बिना उनका पक्ष सुने कोई भी रिपोर्ट तैयार करना गलत होगा।

बैठक में ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के शैलेन्द्र दुबे, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जे.एन. तिवारी और राजकीय शिक्षक संघ के एस.एस. मिश्र समेत कई बड़े नेता शामिल थे। कर्मचारियों ने अपनी कई पुरानी और नई मांगें रखी हैं, जिन्हें पूरा न करने पर संघर्ष की चेतावनी दी गई है।

प्रमुख मांगें और मुद्दे विवरण
फिटमेंट फैक्टर इसे 2.57 से बढ़ाकर 3.68-3.83 करने की मांग ताकि न्यूनतम मूल वेतन बढ़े
पेंशन और भर्ती पुरानी पेंशन योजना की बहाली और खाली पदों पर नई भर्ती
आउटसोर्सिंग कर्मी समय पर मानदेय देना, ईएसआई और पीएफ सुविधाओं का लाभ पहुंचाना
कर्मयोगी योजना इस योजना के तहत हो रहे कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोकना
भत्ते बंद किए गए भत्तों की वापसी की मांग
श्रम कानून पात्र कर्मचारियों को वेतनवृद्धि और श्रम कानून का लाभ दिलाना
आउटसोर्सिंग सेवा निगम घोषणा के बावजूद धरातल पर निगम का गठन न होना

इसके अलावा, अनुभवी आउटसोर्स कर्मचारियों की बहाली और अकुशल मजदूरों को हाई-टेंशन लाइन के काम से हटाने की मांग भी उठाई गई। संगठनों का कहना है कि 13 जून को हुई ऑनलाइन बैठक में ही यह तय कर लिया गया था कि अगर सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाएगी, तो वे प्रेस कॉन्फ्रेंस और रणनीतिक बैठक के जरिए विरोध दर्ज कराएंगे।