Lucknow में बिना सूचना बढ़ाया गया बिजली लोड, नाराज उपभोक्ताओं ने किया प्रदर्शन; जानें क्या है पूरा मामला
Lucknow: लखनऊ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली विभाग ने अचानक कनेक्शन का लोड बढ़ा दिया है, जिसकी जानकारी लोगों को सिर्फ एक एसएमएस के जरिए मिली। इस कार्रवाई से
Lucknow: लखनऊ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली विभाग ने अचानक कनेक्शन का लोड बढ़ा दिया है, जिसकी जानकारी लोगों को सिर्फ एक एसएमएस के जरिए मिली। इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं में भारी गुस्सा है और कई इलाकों में लोग बिजली दफ्तरों के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह पूरा मामला 3 जुलाई 2026 का है, जब उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिलिंग सॉफ्टवेयर के जरिए करीब 46.68 लाख उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड बढ़ा दिया। इसके बाद 4 जुलाई को हुसैनगंज, गोमती नगर, पुरनिया और इंद्रलोक कॉलोनी जैसे इलाकों में लोगों ने जमकर विरोध किया। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले को लेकर नियामक आयोग में याचिका भी दाखिल की है और बिना सहमति के लोड बढ़ाने पर रोक लगाने की मांग की है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर यह कदम उठाया है। नियम के मुताबिक, अगर कोई उपभोक्ता तीन महीने तक अपनी सीमा से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करता है, तो उसे एक महीने का नोटिस देना जरूरी होता है। लेकिन यहाँ केवल एसएमएस भेजकर काम चलाया गया। इस लोड वृद्धि की वजह से अब लोगों के बिजली बिल में फिक्स्ड चार्ज और न्यूनतम देय राशि बढ़ जाएगी। करीब 12 लाख गरीब उपभोक्ता इस वजह से सरकारी सब्सिडी से भी बाहर हो गए हैं, जिससे शहरी उपभोक्ताओं को औसतन 435 रुपये और ग्रामीण उपभोक्ताओं को 165 रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।
दूसरी तरफ, UPPCL के निदेशक (वाणिज्यिक) प्रशांत कुमार वर्मा का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों के अनुसार ही की गई है। उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं की अधिकतम मांग लगातार तीन महीनों तक स्वीकृत लोड से ज्यादा थी, उन्हीं का लोड संशोधित किया गया है। विभाग का दावा है कि संशोधित लोड की गणना तीन महीने की अवधि के दौरान दर्ज की गई सबसे कम अधिकतम मांग के आधार पर की गई है।
हालांकि, इसी बीच उपभोक्ताओं को एक राहत की खबर भी मिली है। जुलाई 2026 के बिजली बिलों में ईंधन और बिजली खरीद लागत (FPPAS) में 4.43% की कमी की गई है। इससे राज्य भर के उपभोक्ताओं को करीब 358.31 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा, जो पिछले 15 महीनों की सबसे बड़ी मासिक कटौती है।