Lucknow में बेटों की मौत के बाद बहुओं ने बुजुर्ग महिला को घर से निकाला, संपत्ति कब्जाने का आरोप
Lucknow: राजधानी लखनऊ की एक बुजुर्ग महिला गीता त्रिपाठी इन दिनों अपनी ही बहुओं के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रही हैं। महिला का आरोप है कि उनके बेटों की मौत के बाद उनकी बहुओं ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया और उनकी संपत्ति
Lucknow: राजधानी लखनऊ की एक बुजुर्ग महिला गीता त्रिपाठी इन दिनों अपनी ही बहुओं के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रही हैं। महिला का आरोप है कि उनके बेटों की मौत के बाद उनकी बहुओं ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया और उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की। फिलहाल वह अपनी बेटी और दामाद के साथ रह रही हैं।
मामले की जानकारी के मुताबिक गीता त्रिपाठी के पति और दोनों बेटों की बीमारी की वजह से मौत हो चुकी है। उनके एक बेटे विशाल त्रिपाठी का निधन 2024 में और दूसरे बेटे मनीष त्रिपाठी का निधन 2025 या 2026 के दौरान हुआ था। महिला का कहना है कि बेटों के जाने के बाद निहारिका और प्रीति त्रिपाठी नाम की उनकी दो बहुओं ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया और उन्हें घर से निकाल दिया। गीता त्रिपाठी पिछले चार से छह महीने से अपने घर से बाहर रहने को मजबूर हैं।
पीड़िता ने बताया कि उन्होंने अपनी संपत्ति पहले ही उपहार विलेख के जरिए अपनी बेटी के नाम कर दी थी। इस विवाद को लेकर गोमतीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, लेकिन महिला का आरोप है कि पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। वह न्याय पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं।
इस मामले में संपत्ति विवाद और घरेलू हिंसा से जुड़े दीवानी और आपराधिक मामले अदालतों में लंबित हैं। महिला का दावा है कि ये मुकदमे सात साल से चल रहे हैं। इसी बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, जिसमें कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम का इस्तेमाल सिर्फ संपत्ति विवाद सुलझाने के लिए नहीं हो सकता और ऐसे मामलों के लिए सिविल कोर्ट सही जगह है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम उन जोड़ों पर भी लागू होता है जो पहले एक साझा घर में रहते थे।