UP: लखनऊ में मोहर्रम के आयोजनों को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी सिलसिले में अफहाम-ए-जमा सोसाइटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। इस बैठक में मुख्य रूप से धार्मिक परंपराओं को बहाल करने और सुरक्षा निय
UP: लखनऊ में मोहर्रम के आयोजनों को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी सिलसिले में अफहाम-ए-जमा सोसाइटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। इस बैठक में मुख्य रूप से धार्मिक परंपराओं को बहाल करने और सुरक्षा नियमों के बीच जुलूस निकालने की मांग पर चर्चा हुई।
डेलिगेशन ने जिलाधिकारी के सामने क्या मांगें रखीं
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि मोहर्रम के जुलूस में 72 तोले सोने के अलम को शामिल किया जाए। इसके साथ ही हुसैनाबाद ट्रस्ट की शाही जरीह को विधिवत दफन कराने की अनुमति मांगी गई है। डेलिगेशन ने बताया कि लखनऊ की अजादारी बहाल होने के बावजूद शाही जरीह की तदफीन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।
लखनऊ में लागू निषेधाज्ञा और प्रशासन के नियम
शहर की सुरक्षा को देखते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने 21 मई, 2026 से 19 जुलाई तक धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर रखी है। इस नियम के मुताबिक, बिना अनुमति के पांच या उससे ज्यादा लोग एक जगह जमा नहीं हो सकते और न ही कोई जुलूस निकाला जा सकता है। किसी भी धार्मिक आयोजन या मजलिस के लिए प्रशासन से पहले मंजूरी लेना जरूरी है।
शाही जरीह और जुलूस का पुराना इतिहास
परंपरा के अनुसार, शाही जरीह का जुलूस मोहर्रम की पहली तारीख को बड़े इमामबाड़े से शुरू होकर छोटे इमामबाड़े तक जाता था, जहां 10 मुहर्रम को उसे दफन किया जाता था। हालांकि, यह सिलसिला साल 1977 से बंद है। हाल के कुछ वर्षों में कुछ जुलूस तो निकले, लेकिन दफन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी, जिसे अब दोबारा शुरू करने की मांग की जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में मोहर्रम के जुलूस के लिए क्या नियम लागू हैं
शहर में 19 जुलाई तक धारा-163 लागू है, जिसके तहत किसी भी जुलूस या सभा के लिए प्रशासन की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। साथ ही रात 12 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने पर पाबंदी है।
अफहाम-ए-जमा सोसाइटी की मुख्य मांग क्या है
सोसाइटी ने 72 तोले सोने के अलम को जुलूस में शामिल करने और हुसैनाबाद ट्रस्ट की शाही जरीह का सम्मानपूर्वक दफन कराने की मांग की है।