UP : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और अपर जिलाधिकारी (ADM) न्यायिक को अपनी मर्यादा भूलने की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों पर 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया
UP : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और अपर जिलाधिकारी (ADM) न्यायिक को अपनी मर्यादा भूलने की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों पर 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक कंपनी के खिलाफ अवैध कदम उठाने के कारण की गई है।
अधिकारियों ने क्या गलती की और क्यों लगा जुर्माना?
मामला निवास कालोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड की एक याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने पाया कि DM और ADM न्यायिक ने यूपी राजस्व संहिता, 2006 की धारा 104 और 105 का उल्लंघन किया। नियम के मुताबिक ऐसी कार्रवाई केवल एसडीएम (SDM) ही कर सकता है, लेकिन इन अधिकारियों ने बिना वैधानिक अधिकार के केस दर्ज कर लिया। जस्टिस पंकज भाटिया ने इसे प्रशासनिक अतिरेक और मनमाना फैसला बताया।
जुर्माने का भुगतान कैसे होगा और पूरा मामला क्या था?
कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि यह 40 हजार रुपये का कुल जुर्माना अधिकारियों को अपने व्यक्तिगत बैंक खातों से भरना होगा, सरकारी खजाने से नहीं। यह भुगतान छह हफ्ते के अंदर करना होगा। दरअसल, आर.पी. सिंह नाम के एक वकील ने जमीन के अवैध हस्तांतरण की शिकायत की थी। DM ने इसे ADM न्यायिक को भेज दिया, जिन्होंने बिना जांच किए कंपनी को जमीन बेचने और निर्माण रोकने का आदेश दे दिया, जबकि जमीन पहले से ही कंपनी के नाम पर दर्ज थी।
शिकायतकर्ता वकील पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने सिर्फ अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि शिकायत करने वाले वकील आर.पी. सिंह को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वकील का उस जमीन से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी उन्होंने अपने कानूनी ज्ञान का गलत इस्तेमाल किया। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वकील ने याचिकाकर्ता कंपनी को डराने और ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
DM और ADM पर जुर्माना क्यों लगाया गया?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाया कि लखनऊ DM और ADM न्यायिक ने यूपी राजस्व संहिता के नियमों का उल्लंघन कर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की और बिना कानूनी आधार के एक कंपनी को परेशान किया।
जुर्माने की राशि का भुगतान कौन करेगा?
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जिलाधिकारी और एडीएम न्यायिक को 20-20 हजार रुपये का जुर्माना अपने व्यक्तिगत खातों से 6 सप्ताह के भीतर जमा करना होगा।