Lucknow: DL एजेंसियों की मनमानी, प्राइवेट कर्मचारियों पर आवेदकों से वसूली का दबाव; CM ऑफिस पहुंची शिकायत
Lucknow: उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने वाली प्राइवेट एजेंसियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं। इन एजेंसियों पर आरोप है कि वे अपने कर्मचारियों पर आवेदकों से पैसा वसूलने का दबाव बना रही हैं। मामला अब मुख्यमंत्
Lucknow: उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने वाली प्राइवेट एजेंसियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं। इन एजेंसियों पर आरोप है कि वे अपने कर्मचारियों पर आवेदकों से पैसा वसूलने का दबाव बना रही हैं। मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) तक पहुंच गया है, जिसके बाद प्रशासन इस पूरे खेल की जांच करने की तैयारी में है।
प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने और पहुंचाने की जिम्मेदारी Fokam, Silver Touch और Rosmarta नाम की तीन प्राइवेट एजेंसियों को दी गई है। आरोप है कि ये एजेंसियां न केवल आवेदकों को परेशान कर रही हैं, बल्कि अपने ही कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं। शिकायत के मुताबिक, कई युवाओं से नौकरी देने के नाम पर 3-3 लाख रुपये लिए गए और बाद में जब उन्होंने अपनी सैलरी वापस नहीं की, तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
इस मामले को लेकर 23 जून को कुछ युवा लखनऊ में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ऑफिस पहुंचे थे और न्याय न मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। इसके बाद एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (IT) विजय कुमार सिंह ने शिकायतें स्वीकार कीं और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। उन्होंने बताया कि जिन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, उनसे संपर्क कर सबूत जुटाए जा रहे हैं और दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर आशुतोष निरंजन ने पहले ही इस बात पर नाराजगी जताई थी कि एजेंसियां कर्मचारियों को जॉइनिंग लेटर, आईडी कार्ड और ESI जैसी सुविधाएं नहीं दे रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 320 कर्मचारियों की भर्ती हुई थी, जिनमें से 45 को सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि उन्होंने एजेंसियों को अपनी सैलरी का हिस्सा (एडवांस) देने से मना कर दिया था।
इस पूरे मामले में अब तक 32 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की शिकायत भी शामिल है। इससे पहले फरवरी में पूर्व ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किंजल सिंह ने 25 जिलों के डीएम से इस वसूली के खेल पर रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें कुछ गिरोहों के शामिल होने का शक जताया गया था। अब पीड़ित लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी गुहार लगाने की योजना बना रहे हैं।