UP: लखनऊ के जिला कोर्ट परिसर के बाहर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई अब एक बड़े विवाद में बदल गई है। इलाहाबाद High Court की लखनऊ बेंच के आदेश पर नगर निगम ने जब बुलडोजर चलाया, तो वकीलों और पुलिस के बीच जमकर भिड़ंत हुई। इस
UP: लखनऊ के जिला कोर्ट परिसर के बाहर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई अब एक बड़े विवाद में बदल गई है। इलाहाबाद High Court की लखनऊ बेंच के आदेश पर नगर निगम ने जब बुलडोजर चलाया, तो वकीलों और पुलिस के बीच जमकर भिड़ंत हुई। इस हंगामे के बाद अब वकीलों ने पुलिस पर बेरहमी से लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया है, जिससे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
तोड़फोड़ की कार्रवाई और विवाद की वजह क्या है?
नगर निगम ने 17 मई 2026 को अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया था। इसके लिए पहले ही 16 मई तक का नोटिस दिया गया था। वकीलों का कहना है कि High Court ने केवल 72 चैंबर हटाने को कहा था, लेकिन प्रशासन ने करीब 240 चैंबर गिरा दिए। वहीं अधिकारियों का दावा है कि 240 अवैध निर्माणों की पहचान हुई थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस और वकीलों में झड़प हुई, जिसमें पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया।
वकीलों की मांग और हड़ताल का असर
लाठीचार्ज से नाराज लखनऊ के वकीलों ने 18 मई से 20 मई 2026 तक पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार (हड़ताल) का ऐलान किया है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र यादव और अन्य सदस्यों ने इंस्पेक्टर ओमवीर सिंह समेत 25 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। वकीलों का आरोप है कि उन्हें सामान हटाने का समय नहीं मिला और कई साथियों को गंभीर चोटें आई हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस घटना की निंदा करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है।
अब आगे क्या होगा और वर्तमान स्थिति क्या है?
18 मई को प्रशासन ने फिलहाल तोड़फोड़ की कार्रवाई रोक दी है और आज बुलडोजर नहीं चलेंगे। हालांकि, अभी भी लगभग 50 चैंबर गिराए जाने बाकी हैं। नगर निगम को 25 मई 2026 तक High Court में इस पूरी कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करनी है। पुलिस का कहना है कि पथराव के बाद ही लाठियां फटकारी गईं, जबकि वकीलों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में वकीलों की हड़ताल कब तक चलेगी?
लखनऊ के वकीलों ने 18 मई से 20 मई 2026 तक तीन दिनों के लिए पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार की घोषणा की है।
नगर निगम ने यह कार्रवाई क्यों की?
यह कार्रवाई इलाहाबाद High Court की लखनऊ बेंच के आदेश पर की गई, जिसमें जिला कोर्ट परिसर के बाहर से अवैध कब्जों और अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया गया था।