UP: लखनऊ जिला अदालत परिसर के बाहर रविवार सुबह उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब नगर निगम के बुलडोजर अवैध चैंबरों को गिराने पहुंचे। इस कार्रवाई का वकीलों ने कड़ा विरोध किया, जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच
UP: लखनऊ जिला अदालत परिसर के बाहर रविवार सुबह उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब नगर निगम के बुलडोजर अवैध चैंबरों को गिराने पहुंचे। इस कार्रवाई का वकीलों ने कड़ा विरोध किया, जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिससे पूरा कोर्ट परिसर रणभूमि में बदल गया।
क्यों हुई बुलडोजर कार्रवाई और क्या था आदेश
यह पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) के आदेश के बाद की गई। कोर्ट ने अनुराधा सिंह की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला कोर्ट परिसर के आसपास बने अवैध चैंबरों और दुकानों को हटाने का निर्देश दिया था। नगर निगम ने इस अभियान से पहले अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर 16 मई, 2026 तक जगह खाली करने का समय दिया था। प्रशासन का कहना है कि कई निर्माण नालों और सार्वजनिक जमीन पर थे, जिससे यातायात में दिक्कत हो रही थी।
वकीलों के आरोप और मौके का हाल
कार्रवाई के दौरान वकीलों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना उचित सूचना के हटाया गया और वैध चैंबरों को भी तोड़ दिया गया। वकीलों का दावा है कि हाईकोर्ट ने केवल 72 चैंबर हटाने को कहा था, लेकिन प्रशासन ने लगभग 240 चैंबर ध्वस्त कर दिए। इस तनाव के बीच एक अधिवक्ता ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने समय रहते बचा लिया। झड़पों में कई वकील और पुलिसकर्मी घायल हुए। मौके पर चार ACP और PAC समेत भारी पुलिस बल तैनात रहा।
आगे क्या होगा और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद वकीलों ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए 18 और 19 मई को दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज काका ने वकीलों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। डीसीपी पश्चिम कमलेश दीक्षित ने बताया कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी थी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बल मौजूद था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ कोर्ट परिसर में बुलडोजर कार्रवाई क्यों हुई?
यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर की गई थी ताकि जिला कोर्ट परिसर के आसपास बने अवैध चैंबरों और दुकानों को हटाकर अतिक्रमण मुक्त किया जा सके।
वकीलों ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाए हैं?
वकीलों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने केवल 72 चैंबर हटाने का आदेश दिया था, लेकिन नगर निगम ने करीब 240 चैंबर गिरा दिए और उन्हें कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई।