Lucknow जिला कचहरी में मारपीट मामला: 4 वकीलों के कोर्ट में घुसने पर रोक, IB करेगा जांच

Lucknow: लखनऊ जिला न्यायालय परिसर में 21 जुलाई 2026 को हुई मारपीट और हंगामे के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और चा

Lucknow: लखनऊ जिला न्यायालय परिसर में 21 जुलाई 2026 को हुई मारपीट और हंगामे के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और चार वकीलों के कोर्ट परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने और वादकारियों के साथ बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हाईकोर्ट ने सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडे, यश पांडे और अभय प्रताप वर्मा नाम के वकीलों को 24 अगस्त 2026 तक लखनऊ के किसी भी कोर्ट परिसर में जाने से रोक दिया है। हालांकि, अगर उन्हें किसी आपराधिक मामले में कानूनन पेश होना है, तो इसकी अनुमति होगी। अदालत ने इन चारों वकीलों से पिछले 10 साल का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और पिछले 5 साल में की गई संपत्तियों की खरीद-बिक्री का पूरा ब्यौरा हलफनामे के जरिए मांगा है। साथ ही, उनके परिवार के जीवित सदस्यों की जानकारी भी देनी होगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने Intelligence Bureau (IB) के स्थानीय कार्यालय को इन वकीलों की गतिविधियों और बैकग्राउंड की गोपनीय जांच करने का आदेश दिया है। जांच रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी जाएगी। इसके अलावा, आजमगढ़ के SSP को निर्देश दिया गया है कि वे पीड़ित मोहम्मद शाकिर को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराएं।

कोर्ट ने इस मामले में कई कड़े निर्देश दिए हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:

निर्देश का विषय विवरण
प्रवेश प्रतिबंध 4 वकीलों का 24 अगस्त तक कोर्ट परिसर में प्रवेश बंद
वित्तीय जांच 10 साल का ITR और 5 साल का संपत्ति विवरण मांगा गया
गोपनीय जांच Intelligence Bureau (IB) द्वारा बैकग्राउंड चेक का आदेश
रिकॉर्ड सुरक्षा सूट संख्या 1317/2022 और 2933/2025 के रिकॉर्ड को सील करने का आदेश
पुलिस जांच BNS की धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत जांच के निर्देश
पीड़ित सुरक्षा मोहम्मद शाकिर को आजमगढ़ में पुलिस सुरक्षा देने का आदेश

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि आरोपी वकील सौरभ कुमार वर्मा पर चोरी, धोखाधड़ी और मारपीट जैसे 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि हर्षित पांडे पर भी एक केस लंबित है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कुछ वकील प्रॉपर्टी डीलिंग और जमीन कब्जाने के खेल में शामिल हैं और विरोधी पक्षों को डराते हैं। कोर्ट ने बार के भीतर ऐसी “काली भेड़ों” को बाहर निकालने और वकालत के पेशे की गरिमा बचाने की बात कही। इस मामले में अब अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी, जबकि पुलिस अधिकारियों को 13 अगस्त को कार्रवाई का ब्यौरा देने के लिए पेश होना होगा।