Lucknow में डीजल इंजन की भावुक विदाई, 35 साल बाद रिटायर हुए पुराने इंजन

UP: लखनऊ में भारतीय रेलवे के उन डीजल इंजनों को भावुक विदाई दी गई जो पिछले 35 सालों से पटरियों पर दौड़ रहे थे। इन इंजनों ने करोड़ों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुँचाया, लेकिन अब इनका सफर खत्म हो गया है। अब इन पुराने इंजनो

UP: लखनऊ में भारतीय रेलवे के उन डीजल इंजनों को भावुक विदाई दी गई जो पिछले 35 सालों से पटरियों पर दौड़ रहे थे। इन इंजनों ने करोड़ों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुँचाया, लेकिन अब इनका सफर खत्म हो गया है। अब इन पुराने इंजनों को ई-नीलामी के जरिए स्क्रैप किया जाएगा।

पुराने इंजन अब कैसे किए जाएंगे स्क्रैप

रेलवे ने पुराने इंजनों के निपटारे के लिए पूरी तरह से ई-नीलामी का सिस्टम अपनाया है। यह पूरी प्रक्रिया IREPS पोर्टल के जरिए होगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। जो लोग या कंपनियां इसे खरीदना चाहती हैं, उन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होगा और फीस जमा करनी होगी। इसके बाद स्टोर डिपो में दस्तावेजों की जांच होगी और फिर बोली लगाई जाएगी।

इंजनों को रिटायर करने का क्या है नियम

रेलवे बोर्ड ने जुलाई 2020 में डीजल इंजनों की सर्विस लाइफ 36 साल से घटाकर 30 साल कर दी थी ताकि पुराने इंजनों को जल्दी हटाया जा सके। आमतौर पर इनका जीवनकाल 35 साल होता है, लेकिन अच्छी देखरेख से यह 40 से 45 साल तक भी चल सकते हैं। जब रखरखाव का खर्च बढ़ जाता है या सुरक्षा संबंधी चिंताएं होती हैं, तब इन्हें रिटायर कर दिया जाता है।

रेलवे का भविष्य और नई तकनीक

भारतीय रेलवे अब पूरी तरह से बिजली से चलने वाली ट्रेनों की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2026 तक कुल 70,117 किलोमीटर में से सिर्फ 405 किलोमीटर का रास्ता ही बिना बिजली का बचा है। हालांकि, इमरजेंसी और रणनीतिक जरूरतों के लिए रेलवे 2,500 डीजल इंजन अपने पास रखेगा। इसके अलावा भारत अब दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण भी कर रहा है।

विवरण जानकारी
रिटायरमेंट का समय 35 साल
नीलामी का माध्यम IREPS पोर्टल (ई-नीलामी)
बचा हुआ बिना बिजली का रूट 405 rkm (जनवरी 2026 तक)
रखे जाने वाले डीजल इंजन 2,500 यूनिट
नई तकनीक हाइड्रोजन ट्रेन परीक्षण

Frequently Asked Questions (FAQs)

पुराने डीजल इंजनों की नीलामी कैसे होगी

इन इंजनों की नीलामी भारतीय रेलवे के ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (IREPS) के जरिए होगी। इसमें रजिस्टर्ड खरीदार ऑनलाइन बोली लगाकर स्क्रैप खरीद सकेंगे।

क्या अब सभी डीजल इंजन खत्म हो जाएंगे

नहीं, रेलवे 100% विद्युतीकरण की ओर बढ़ रहा है लेकिन इमरजेंसी और खास जरूरतों के लिए 2,500 डीजल इंजन अभी भी रखे जाएंगे।