Lucknow में अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाला अंतरराष्ट्रीय गिरोह पकड़ा गया, VoIP तकनीक से करते थे धोखाधड़ी
Lucknow: लखनऊ की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो अमेरिका के लोगों को अपना शिकार बना रहा था। डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि ये जालसाज VoIP तकनीक का इस्तेमाल कर विदेश में
Lucknow: लखनऊ की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो अमेरिका के लोगों को अपना शिकार बना रहा था। डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि ये जालसाज VoIP तकनीक का इस्तेमाल कर विदेश में बैठे लोगों को ठगते थे। पुलिस ने इस मामले में कई गिरफ्तारियां की हैं और जांच अभी जारी है।
इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब क्राइम ब्रांच ने 1 और 18 जुलाई 2026 को दो बड़े फर्जी कॉल सेंटरों पर छापा मारा। 22 जुलाई को डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने विभूतिखंड में एक और फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जाने की जानकारी दी। यह पूरी कार्रवाई ‘ऑपरेशन साइ-वज्र’ के तहत की गई है।
जालसाज लोग गूगल पर फर्जी एप्पल कस्टमर सपोर्ट की वेबसाइट चलाते थे। वे विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर पर वायरस और मैलवेयर के फर्जी मैसेज भेजते थे, जिसमें एक टोल-फ्री नंबर होता था। जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता था, तो आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट टेक्निकल सपोर्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट या अमेरिकी सरकारी एजेंसी जैसे FTC और सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताते थे। वे पीड़ितों को डराते थे कि उनका बैंक अकाउंट या सोशल सिक्योरिटी नंबर खतरे में है और तुरंत पैसे न देने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ठगी के लिए ये लोग गिफ्ट कार्ड, सोना या कैश की मांग करते थे।
पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। विभूतिखंड से मास्टरमाइंड सूरज त्रिपाठी, विवेक पांडेय, राहुल त्रिपाठी और मुंबई के तकनीकी एक्सपर्ट आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की को पकड़ा गया है। आकाश ही फर्जी वेबसाइट और कॉलिंग सिस्टम संभालता था। वहीं ओमैक्स रेजीडेंसी में हुई छापेमारी में पुनीत वर्मा और देवेंद्र पटेल समेत सात लोग पकड़े गए। इससे पहले जनवरी 2025 में ‘सोलारिस सॉल्यूशंस’ नाम के कॉल सेंटर से 119 लोग गिरफ्तार हुए थे।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि आरोपी इंटरनेट टेलीफोनी का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच में पता चला कि कॉलिंग के लिए जरूरी सर्वर और तकनीकी मदद विदेश में बैठे उनके साथियों से मिल रही थी। इस गिरोह ने डॉरिस नाम की एक अमेरिकी महिला से करीब 70,000 डॉलर की ठगी की थी। पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत मामला दर्ज किया है।