Lucknow में APK फाइल क्लिक करते ही उड़े 15.20 लाख रुपये, साइबर ठगों ने 3 लोगों को बनाया शिकार
Lucknow: राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ किया है। सिर्फ एक APK फाइल पर क्लिक करते ही तीन लोगों के बैंक खातों से कुल 15.20 लाख रुपये पार हो गए। पुलिस ने इस मामले में केस दर
Lucknow: राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ किया है। सिर्फ एक APK फाइल पर क्लिक करते ही तीन लोगों के बैंक खातों से कुल 15.20 लाख रुपये पार हो गए। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और ठगों की तलाश में जांच शुरू कर दी है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब लखनऊ पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 2 जुलाई 2026 को पुलिस ने विभूति खंड स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहे एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। इस ऑपरेशन में पुलिस ने ‘Solaris Solution’ नाम से चल रहे केंद्र से 119 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 40 महिलाएं भी शामिल हैं। इस गैंग के मास्टरमाइंड ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार बताए जा रहे हैं, जो मूल रूप से अहमदाबाद के रहने वाले हैं।
जांच में पता चला है कि यह कॉल सेंटर मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाता था। ये लोग ‘Dollar App’ के जरिए तकनीकी धोखाधड़ी करते थे और रात के समय लोगों को ठगते थे। पुलिस का अनुमान है कि इस पूरे घोटाले की रकम 200 से 250 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। मौके से 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन, VoIP कॉलिंग सिस्टम और कई डिजिटल स्टोरेज डिवाइस जब्त किए गए हैं।
साइबर पुलिस और पूर्व IPS अधिकारी त्रिवेणी सिंह ने चेतावनी दी है कि व्हाट्सएप या किसी अनजान लिंक से आने वाली APK फाइल को कभी डाउनलोड न करें। इन फाइलों में ऐसा कोड होता है जिससे ठग आपके फोन का पूरा एक्सेस पा लेते हैं। इसके बाद वे आपके SMS पढ़ सकते हैं, OTP चोरी कर सकते हैं और बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बना लेते हैं। लखनऊ में पहले भी ऐसे मामले आए हैं, जहां मार्च में एक कारोबारी ने 52.31 लाख और जून में एक अन्य व्यक्ति ने 18 लाख रुपये इसी तरह के APK फ्रॉड में गंवाए थे।
पुलिस अधिकारियों ने सलाह दी है कि अगर कोई साइबर ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के टोल फ्री नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।