Lucknow में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़, 35 लाख रुपये फ्रीज और दो आरोपी गिरफ्तार

Lucknow: लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने ऑपरेशन सीवाईवीएजेआरए के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह को पकड़ा है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और ठगों के तीन बैंक खातों में रखे 35 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं

Lucknow: लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने ऑपरेशन सीवाईवीएजेआरए के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह को पकड़ा है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और ठगों के तीन बैंक खातों में रखे 35 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। यह पूरी कार्रवाई हवाई अड्डे के सेवानिवृत्त निदेशक भोलानाथ प्रसाद भगत और उनकी पत्नी माधुरी भगत के साथ हुई 70 लाख रुपये की धोखाधड़ी के बाद की गई है।

मामले की जानकारी के मुताबिक, पीड़िता माधुरी भगत को 16 से 22 जुलाई 2026 तक डिजिटल अरेस्ट करके डराया गया था। ठग खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बता रहे थे और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों में फंसाने की धमकी दे रहे थे। डर के मारे पीड़िता ने अपने बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट से कुल 70 लाख रुपये चार अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए थे। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत एक्शन लिया और 35 लाख रुपये की रकम को फ्रीज करा लिया है।

पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह पूरा खेल ई-सिम एक्टिवेशन के जरिए चल रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ अमित (आजमगढ़ निवासी) और सुमित कुमार रावत (लखनऊ निवासी) शामिल हैं। सुमित ग्राहकों के केवाईसी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर अतिरिक्त सिम निकालता था, जिन्हें ई-सिम में बदलकर प्रवीण को दिया जाता था। प्रवीण इन सिम प्रोफाइल्स को टेलीग्राम के जरिए कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों को करीब 50 USDT (क्रिप्टोकरेंसी) प्रति सिम के हिसाब से बेचता था।

विवरण जानकारी
मुख्य आरोपी प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ अमित (आजमगढ़)
सहयोगी आरोपी सुमित कुमार रावत (लखनऊ)
बरामदगी 105 सिम रैपर, 5 खुले सिम, बायबिट क्रिप्टो वॉलेट
ठगी का तरीका डिजिटल अरेस्ट और ई-सिम का दुरुपयोग
फ्रीज की गई राशि 35 लाख रुपये
कुल ठगी 70 लाख रुपये

एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगर कोई सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगे या धमकाए, तो उस पर भरोसा न करें। किसी भी साइबर ठगी की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सलाह दी कि नया सिम लेते समय केवाईसी खुद करें और चेक करें कि आपके नाम पर कोई फालतू सिम तो नहीं चल रही है।