Lucknow में नकली दवा रैकेट के आरोपी की जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा- जनस्वास्थ्य के लिए है गंभीर खतरा

Lucknow: लखनऊ की एक सत्र अदालत ने नकली दवाओं के बड़े रैकेट में पकड़े गए आरोपी भूपेंद्र सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और कहा है कि नकली दवाओं का कारोबार आम लोगों की सेहत

Lucknow: लखनऊ की एक सत्र अदालत ने नकली दवाओं के बड़े रैकेट में पकड़े गए आरोपी भूपेंद्र सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और कहा है कि नकली दवाओं का कारोबार आम लोगों की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा है। अदालत के मुताबिक, अभी इस पूरे मामले की जांच चल रही है, इसलिए आरोपी को फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश में चल रहे नकली दवाओं के खिलाफ एक बड़े अभियान से जुड़ा है। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) ने एक संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया था। इस गैंग के लोग फर्जी बिलिंग और कागजी हेरफेर के जरिए नकली दवाओं को बाजार में सप्लाई कर रहे थे। लखनऊ इस पूरे नेटवर्क के लिए एक मुख्य सप्लाई हब बन गया था, जहां से दवाएं पश्चिमी यूपी से लेकर वाराणसी तक भेजी जा रही थीं।

जांच के दौरान लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में एक अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली एलोपैथिक दवाएं जब्त की गई थीं। पुलिस और FSDA ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। 17 जुलाई को बीकेटी से गिरफ्तार भूपेंद्र सिंह ने पूछताछ में बताया था कि उसे ये दवाएं राज विक्रम सिंह और विनीत सिंह से मिली थीं। इसके अलावा राजस्थान से जुड़े सप्लायर भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेंद्र गुर्जर के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने करीब 20 करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त की गईं और 50 से ज्यादा मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई की गई। गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की मदद से उत्तराखंड के देहरादून में एक अवैध यूनिट भी पकड़ी गई, जहां बड़े ब्रांड्स की नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। फिलहाल FSDA ने अमीनाबाद के कई थोक दवा प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है और उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।