UP : लखनऊ में सिटी बसों के संविदा परिचालक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। परिवहन विभाग द्वारा उन्हें निजी फर्म SS Enterprises में भेजने के विरोध में मंगलवार को सैकड़ों कर्मचारी हजरतगंज पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनका
UP : लखनऊ में सिटी बसों के संविदा परिचालक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। परिवहन विभाग द्वारा उन्हें निजी फर्म SS Enterprises में भेजने के विरोध में मंगलवार को सैकड़ों कर्मचारी हजरतगंज पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया है। इस हड़ताल की वजह से शहर के 22 प्रमुख रूटों पर बस सेवा पूरी तरह प्रभावित हुई है।
कर्मचारी क्यों कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें परिवहन विभाग से हटाकर एक निजी कंपनी में समायोजित किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस कदम से उनकी नौकरी की स्थिरता, वेतन, पेंशन और चिकित्सा सुविधाओं पर खतरा मंडरा रहा है। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि उन्हें UPSRTC या परिवहन विभाग में ही रखा जाए। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें पिछले कुछ महीनों से पूरा वेतन नहीं मिला है और कुछ के खातों में बहुत कम पैसे आ रहे हैं।
आत्मदाह की कोशिश और राजनीतिक प्रतिक्रिया
विरोध की यह लहर इतनी तेज थी कि 1 जून को चार संविदा परिचालकों ने मुख्यमंत्री आवास के पास पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने समय रहते उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया। इन कर्मचारियों की पहचान मुकेश सैनी, ज्ञानेंद्र रावत, नितिन श्रीवास्तव और अभिषेक सिंह के रूप में हुई है। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताते हुए इसकी निंदा की है।
विरोध प्रदर्शन का घटनाक्रम और प्रभाव
- 30 मई: दुबग्गा डिपो में 400 से ज्यादा कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार शुरू किया।
- 1 जून: चार कर्मचारियों ने लाल बत्ती चौराहे पर आत्मदाह का प्रयास किया।
- 2 जून: हजरतगंज की गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
- प्रभाव: शहर की सिटी बस सेवा ठप होने से आम यात्रियों को काफी परेशानी हुई।
Frequently Asked Questions (FAQs)
संविदा परिचालक किस निजी कंपनी का विरोध कर रहे हैं?
कर्मचारी SS Enterprises नाम की निजी फर्म में अपने समायोजन का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह कंपनी परिवहन मंत्री के भतीजे की है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
उनकी मुख्य मांग है कि उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) या परिवहन विभाग में समायोजित किया जाए और बकाया वेतन का भुगतान हो।