UP: लखनऊ के दुबग्गा डिपो में कार्यरत संविदा चालक और परिचालक अपनी नौकरी को लेकर काफी परेशान हैं। इन कर्मचारियों को एसएस एंटरप्राइजेज नाम की एक प्राइवेट कंपनी में भेजा जा रहा है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का क
UP: लखनऊ के दुबग्गा डिपो में कार्यरत संविदा चालक और परिचालक अपनी नौकरी को लेकर काफी परेशान हैं। इन कर्मचारियों को एसएस एंटरप्राइजेज नाम की एक प्राइवेट कंपनी में भेजा जा रहा है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने महाकुंभ और श्रीराम मंदिर दर्शन जैसे बड़े आयोजनों में पूरी निष्ठा से ड्यूटी की, लेकिन अब उन्हें अचानक निजीकरण के जरिए बाहर निकालने की तैयारी की जा रही है।
निजीकरण के विरोध में क्यों हो रहा है प्रदर्शन
संविदाकर्मियों का आरोप है कि प्राइवेट कंपनी में जाने के बाद उनका शोषण बढ़ेगा और वेतन में कटौती होगी। इस विरोध के कारण शहर के 22 मुख्य रूटों पर सिटी बसों का संचालन रुक गया था। कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है। बिजली विभाग और NHM के कर्मचारी भी इसी तरह की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं, जहां हजारों लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।
सरकार के नियम और संविदाकर्मियों की स्थिति
उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 जून 2026 को ESMA लागू कर दिया है, जिससे अगले छह महीने तक हड़ताल पर पूरी तरह रोक है। नियम तोड़ने पर गिरफ्तारी हो सकती है। हालांकि, सरकार ने कुछ राहत कदम भी उठाए हैं जैसे कि 7 मई 2026 से आउटसोर्स कर्मियों के लिए डिजिटल वेतन भुगतान और न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने के नए नियम लागू किए गए हैं।
- ऊर्जा मंत्री ने निर्देश दिया है कि बिना वैध कारण संविदाकर्मियों को न हटाया जाए।
- सरकार एक अलग आउटसोर्सिंग कॉर्पोरेशन बनाने की योजना पर काम कर रही है।
- मजदूरी संहिता नियमावली 2026 का मसौदा तैयार किया जा रहा है।
- पिछले ढाई साल में प्रदेश में 25 हजार से ज्यादा संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में संविदाकर्मी किस बात का विरोध कर रहे हैं?
संविदाकर्मी दुबग्गा डिपो से एसएस एंटरप्राइजेज जैसी निजी कंपनी में विलय का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि प्राइवेट कंपनी में जाने के बाद उनका वेतन कटेगा और उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा।
क्या उत्तर प्रदेश में संविदाकर्मियों की हड़ताल कानूनी है?
नहीं, यूपी सरकार ने 3 जून 2026 से आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू किया है, जिसके तहत अगले छह महीनों तक सरकारी और संविदा कर्मचारियों की हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध है।