Lucknow कोचिंग अग्निकांड: SIT जांच के दायरे में आए IAS प्रभुनाथ सिंह और अभिषेक प्रकाश, LDA ने भेजे नाम

Lucknow: अलीगंज में हुए कोचिंग सेंटर अग्निकांड की जांच अब बड़े अधिकारियों तक पहुंच गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने विशेष जांच दल (SIT) को पूर्व उपाध्यक्ष रहे IAS अभिषेक प्रकाश और IAS प्रभुनाथ सिंह के नाम भेजे हैं। य

Lucknow: अलीगंज में हुए कोचिंग सेंटर अग्निकांड की जांच अब बड़े अधिकारियों तक पहुंच गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने विशेष जांच दल (SIT) को पूर्व उपाध्यक्ष रहे IAS अभिषेक प्रकाश और IAS प्रभुनाथ सिंह के नाम भेजे हैं। यह पहली बार है जब इस मामले में इतने बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच हो रही है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में काफी हलचल है।

यह पूरा मामला 22 जून 2026 को अलीगंज के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग से जुड़ा है, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 23 जून को SIT का गठन किया गया था। इस टीम में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और ADG प्रवीण कुमार जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। SIT मुख्य रूप से 2016 से 2024 के बीच LDA में तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है कि आखिर अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी कैसे हुई।

LDA ने SIT को 100 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची सौंपी है। इसमें वर्तमान में परिवहन निगम के MD प्रभुनाथ सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अभिषेक प्रकाश के नाम शामिल हैं, जो पहले LDA के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा नगर आयुक्त गौरव कुमार, इंद्रमणि त्रिपाठी, पवन गंगवार और कई अन्य IAS और PCS अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में हैं। इस मामले में भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

श्रेणी जांच के दायरे में आए प्रमुख नाम/संख्या
IAS अधिकारी प्रभुनाथ सिंह, अभिषेक प्रकाश, गौरव कुमार, इंद्रमणि त्रिपाठी, पवन गंगवार, सत्येंद्र यादव, शिवाकांत द्विवेदी, अक्षय त्रिपाठी, एमपी सिंह, ऋतु सुहास, श्रीश चंद्र वर्मा
PCS अधिकारी विपिन शिवहरे, प्रभाकर सिंह, संगीता राघव, सुशील प्रताप सिंह, अमित राठौर, श्रद्धा चौधरी, प्रिया सिंह, डीके सिंह, वीबी मिश्रा
अन्य कर्मचारी 52 जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियंता, 14 अधिशासी और अधीक्षण अभियंता
कुल सूची 100 से अधिक LDA अधिकारी और कर्मचारी

इस बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। 10 जुलाई 2026 को शीर्ष अदालत ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और लखनऊ के नगर आयुक्त को तलब किया है। कोर्ट ने शहर में अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने यह भी साफ किया है कि अगर सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं, LDA प्रवर्तन न्यायालय ने अवैध इमारत को गिराने के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर जल्द ही निर्णय आने की उम्मीद है।