Lucknow कोचिंग अग्निकांड पर NHRC सख्त, डीएम और पुलिस कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट
Lucknow: अलीगंज के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग के मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दखल दिया है। आयोग ने इस घटना का खुद संज्ञान लेते हुए लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस कमिश्नर (CP) को नोटिस जारी किया
Lucknow: अलीगंज के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग के मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दखल दिया है। आयोग ने इस घटना का खुद संज्ञान लेते हुए लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस कमिश्नर (CP) को नोटिस जारी किया है। NHRC ने दोनों अधिकारियों से दो हफ्ते के भीतर इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
यह हादसा 22 जून 2026 को हुआ था जिसमें 15 छात्रों की जान चली गई और 9 अन्य घायल हो गए थे। आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस बहुमंजिला इमारत में यह कोचिंग सेंटर चल रहा था, वहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। शिकायत में कहा गया कि बिल्डिंग में न तो आपातकालीन निकास (Emergency Exit) था और न ही आग से बचने के जरूरी उपकरण। नियमों की अनदेखी के कारण छात्रों को सुरक्षित बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
NHRC ने केवल जिला प्रशासन ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2024 में जारी कोचिंग सेंटर्स के नियमों का पूरे प्रदेश में सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही घायलों के इलाज और पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली राहत की जानकारी भी मांगी गई है।
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यों की SIT गठित की थी, जिसमें अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और ADG प्रवीण कुमार शामिल हैं। SIT ने 23 जून को मौके पर जाकर जांच शुरू कर दी थी। लापरवाही बरतने के आरोप में लखनऊ विकास प्राधिकरण, अग्निशमन और बिजली विभाग के चार अधिकारियों को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला, एनिमेशन स्टूडियो मालिक तुषांत जैसवाल और रामकृष्णा उपाध्याय को गिरफ्तार किया है।
मृतकों के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री ने 5 लाख रुपये और प्रधानमंत्री ने 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। वहीं घायलों को 50 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। जांच में सामने आया कि इस बिल्डिंग में कोचिंग के अलावा लाइब्रेरी, गेमिंग ज़ोन और पेट शॉप जैसे कई व्यावसायिक काम भी चल रहे थे, जिससे सुरक्षा जोखिम और बढ़ गया था।