UP: लखनऊ में सिटी बसों के चालक और परिचालक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। निजी कंपनी के साथ विलय और आउटसोर्सिंग के विरोध में शुरू हुए इस प्रदर्शन की वजह से शहर की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। हजरतगंज और दुबग्गा ड
UP: लखनऊ में सिटी बसों के चालक और परिचालक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। निजी कंपनी के साथ विलय और आउटसोर्सिंग के विरोध में शुरू हुए इस प्रदर्शन की वजह से शहर की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। हजरतगंज और दुबग्गा डिपो में हुए इस हंगामे के बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया है।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
दुबग्गा डिपो के करीब 500 संविदा कर्मचारियों में 326 कंडक्टर शामिल हैं जो तीन प्रमुख मांगों पर अड़े हैं। उनका कहना है कि पिछले 4 महीने का बकाया वेतन तुरंत दिया जाए और सवारी के आधार पर होने वाली वेतन कटौती को बंद किया जाए। साथ ही, कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें निजी ठेकेदारों के बजाय 2019 की नियमावली के तहत सीधे विभाग के साथ अनुबंध दिया जाए।
आम जनता पर क्या असर पड़ा और प्रशासन का क्या कहना है?
इस विरोध प्रदर्शन के कारण लखनऊ के 22 रूटों पर चलने वाली 115 सिटी बसें बंद रहीं, जिससे करीब 20,000 यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सिटी ट्रांसपोर्ट के MD अमरनाथ सहाय ने 24 घंटे में बकाया वेतन देने और भ्रष्टाचार की जांच का भरोसा दिया है। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया को बदलने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह बोर्ड का फैसला है और इसे केवल बोर्ड अध्यक्ष ही रद्द कर सकते हैं।
निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर विवाद क्यों है?
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने सरकारी विज्ञापन देखकर आवेदन किया था, न कि किसी प्राइवेट ठेकेदार के नीचे काम करने के लिए। वहीं, परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने पहले स्पष्ट किया था कि निगम का निजीकरण नहीं होगा, लेकिन 6500 चालकों और परिचालकों की भर्ती आउटसोर्सिंग के जरिए की जाएगी। बस अड्डों को PPP मॉडल पर विकसित करने की योजना है, जिसे लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में सिटी बसों के बंद होने से कितने लोग प्रभावित हुए?
प्रदर्शन के कारण 22 रूटों की 115 सिटी बसें नहीं चलीं, जिससे लगभग 20,000 यात्रियों को आवाजाही में दिक्कत हुई।
चालक-परिचालकों की मुख्य मांगें क्या हैं?
कर्मचारी 4 महीने के बकाया वेतन, सवारी आधारित वेतन कटौती बंद करने और निजी ठेकेदारों के बजाय विभाग से सीधा अनुबंध करने की मांग कर रहे हैं।