Lucknow के चौक वार्ड में जलभराव और पानी की किल्लत, LDA मार्केटों में अतिक्रमण से लोग परेशान
Lucknow: राजधानी के चौक वार्ड की कॉलोनियों में रहने वाले लोग इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां की कॉलोनियां अब तक फ्री-होल्ड नहीं हो पाई हैं, जिसकी वजह से विकास कार्य रुके हुए हैं। स्थानीय निवासियों को
Lucknow: राजधानी के चौक वार्ड की कॉलोनियों में रहने वाले लोग इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां की कॉलोनियां अब तक फ्री-होल्ड नहीं हो पाई हैं, जिसकी वजह से विकास कार्य रुके हुए हैं। स्थानीय निवासियों को पीने के पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है और सड़कों पर जलभराव की समस्या ने जीना मुश्किल कर दिया है।
चौक इलाके के LDA मार्केट की हालत और भी खराब है। पुलिस और नगर निगम की लापरवाही के कारण यहां अतिक्रमण बढ़ गया है, जिससे दुकानदारों और ग्राहकों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं, पूरे शहर में भूजल स्तर पिछले दो दशकों में 20 मीटर तक गिर गया है, जिससे जल संकट और गहरा गया है।
शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात गंभीर हैं। पुरनिया क्षेत्र की एलकेएस कॉलोनी में पिछले 15 सालों से सीवर का पानी भरा हुआ है, जिसके कारण कई लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। मौलवीगंज में भी नाले की सफाई में लापरवाही की वजह से जलभराव हुआ, जिसके विरोध में स्थानीय लोगों ने धरना प्रदर्शन भी किया। रायबरेली रोड की न्यू डिफेंस कॉलोनी में बिना बारिश के ही सड़कें जलमग्न हो गईं, जिसे नगर निगम की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।
दूसरी तरफ, LDA में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्यमंत्री को सौंपी गई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अधिकारियों की मिलीभगत से शहर में 1000 से ज्यादा अवैध निर्माण हुए हैं और 2000 से अधिक ध्वस्तिकरण आदेश लंबित हैं। हालांकि, फरवरी 2026 में LDA ने गोसाईंगंज, सैरपुर और काकोरी जैसे इलाकों में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान चलाकर करीब 40 बीघा जमीन को मुक्त कराया था। चौक के गोल दरवाजे और राजा बाजार में भी कुछ अवैध व्यावसायिक इमारतों को सील किया गया था।
आने वाले मानसून को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। इंदिरानगर, राणा प्रताप मार्ग और पार्क रोड जैसे इलाकों में नालों के निर्माण की धीमी गति और अतिक्रमण के कारण फिर से भारी जलभराव की आशंका है। वहीं, LDA ने 40 साल पुरानी आवासीय योजनाओं के पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू की है, जिसके तहत पुराने जर्जर फ्लैट्स की जगह अब हाईराइज इमारतें बनाई जाएंगी।