Lucknow के चिनहट में ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का समापन, छात्रों को सिखाया प्रकृति संरक्षण का महत्व
Lucknow/Chinhat: लखनऊ के चिनहट इलाके में आयोजित 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का समापन हो गया है। इस कार्यक्रम का मकसद नई पीढ़ी को बौद्ध दर्शन के मूल्यों से जोड़ना और उन्हें पर्यावरण बचाने के लिए
Lucknow/Chinhat: लखनऊ के चिनहट इलाके में आयोजित 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का समापन हो गया है। इस कार्यक्रम का मकसद नई पीढ़ी को बौद्ध दर्शन के मूल्यों से जोड़ना और उन्हें पर्यावरण बचाने के लिए जागरूक करना था। इस कार्यशाला को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग और डिवाइन ग्लोरी पब्लिक स्कूल ने मिलकर आयोजित किया था।
यह कार्यशाला 4 जुलाई 2026 से शुरू होकर 9 जुलाई 2026 तक चली। कार्यक्रम के दौरान तरुणेश बौद्ध ने बताया कि भगवान बुद्ध का पूरा जीवन प्रकृति से जुड़ाव की एक बड़ी मिसाल है। वक्ताओं ने बुद्ध के करुणा, अहिंसा और सह-अस्तित्व जैसे सिद्धांतों पर चर्चा की और बताया कि आज की पर्यावरणीय समस्याओं को सुलझाने में ये मूल्य बहुत मददगार हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना ही सतत विकास का असली रास्ता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और पूर्व प्रधान संदीप सिंह रिंकू ने इस पहल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बचाना अब सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि हम सबकी सामाजिक जिम्मेदारी बन गई है। वहीं स्कूल के प्रबंधक विक्रम सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का विकास होता है और उनमें सामाजिक चेतना जागती है।