Lucknow में रिश्वतखोर रेलवे इंजीनियर को 4 साल की जेल, ठेकेदार से मांगे थे 20 हजार रुपये

Lucknow: लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के बांदा मंडल में तैनात रहे पूर्व अधिकारी गिरिजेश कुमार गौर को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया है। अदालत ने उन्ह

Lucknow: लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के बांदा मंडल में तैनात रहे पूर्व अधिकारी गिरिजेश कुमार गौर को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया है। अदालत ने उन्हें चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह पूरा मामला एक ठेकेदार के बिल को पास कराने से जुड़ा था। गिरिजेश कुमार गौर उस समय सहायक मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (ADSTE) के पद पर थे। आरोप था कि उन्होंने एक ठेकेदार के 80 हजार रुपये के बिल को मंजूरी देने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस घूस की रकम को दो किश्तों में लिया जाना था, जिसमें 10 हजार रुपये बिल पास होने से पहले और 10 हजार रुपये बाद में तय हुए थे।

सीबीआई ने इस मामले में जाल बिछाया और 27 मई 2016 को आरोपी अधिकारी को उनके घर पर ही 9,700 रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था।

विवरण जानकारी
दोषी अधिकारी गिरिजेश कुमार गौर (पूर्व ADSTE)
पद और मंडल सहायक मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता, बांदा मंडल
रिश्वत की मांग 20,000 रुपये (80 हजार के बिल के बदले)
गिरफ्तारी की तारीख 27 मई 2016
सीबीआई केस दर्ज 5 मई 2016
चार्जशीट दाखिल 24 जून 2016
सजा की तारीख 4 अगस्त 2026
कुल सजा 4 साल कठोर कारावास और 20,000 जुर्माना

सीबीआई के एक अधिकारी ने इस फैसले की पुष्टि की है। दोषी अधिकारी को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत यह सजा मिली है।