Lucknow में कैंसर की दवाओं की भारी किल्लत, प्लैटिनम की कीमतें दोगुनी होने से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
Lucknow: लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों में कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है। प्लैटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अचानक आई तेजी की वजह से Cisplatin और Carboplatin जैसी जीवन रक्षक दवा
Lucknow: लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों में कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है। प्लैटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अचानक आई तेजी की वजह से Cisplatin और Carboplatin जैसी जीवन रक्षक दवाओं की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। समय पर डोज न मिलने से मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है और लोग दवाओं के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
इस शॉर्टेज की मुख्य वजह प्लैटिनम की कीमतों में हुआ भारी इजाफा है। पिछले एक साल में प्लैटिनम के दाम दोगुने हो गए हैं और पिछले छह महीनों में ही इसमें 100% की बढ़ोतरी देखी गई है। दक्षिण अफ्रीका में उत्पादन कम होने, ऑटोमोटिव सेक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन में बढ़ती मांग और पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण सप्लाई बाधित हुई है। भारत प्लैटिनम के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है और यूएई जैसे बड़े सप्लायर से भी आपूर्ति में दिक्कतें आई हैं।
दवा कंपनियों के लिए समस्या यह थी कि सरकार ने इन दवाओं की कीमतें तय कर रखी थीं, जिससे कच्चे माल की बढ़ती लागत को झेलना मुश्किल हो गया। इस वजह से Naprod Life Sciences जैसी कंपनियों ने उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया और Venus Remedies जैसी कंपनियां नए कॉन्ट्रैक्ट लेने में सावधानी बरतने लगीं। इससे बाजार में दवाओं की किल्लत और बढ़ गई।
मरीजों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) ने आपातकालीन कदम उठाते हुए चार दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। 7 जून को इस फैसले पर मुहर लगी और 11 व 12 जून 2026 तक नोटिफिकेशन जारी कर दिए गए। NPPA ने जनहित में इन दवाओं की अधिकतम कीमत (Ceiling Rate) में 50% की वृद्धि की है।
| दवा का नाम | पुरानी कीमत (प्रति ml) | नई कीमत (प्रति ml) |
|---|---|---|
| Cisplatin | ₹7.26 | ₹10.89 |
| Carboplatin | ₹60.49 | ₹90.74 |
यह कीमतों में बदलाव केवल एक बार के लिए किया गया है और छह महीने बाद इसकी समीक्षा होगी। इस संकट का असर सिर्फ लखनऊ ही नहीं बल्कि AIIMS दिल्ली, टाटा मेमोरियल सेंटर और सर गंगा राम अस्पताल जैसे बड़े केंद्रों पर भी पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर दवाओं की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो इलाज के नतीजे खराब हो सकते हैं और कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा बढ़ सकता है।