UP: लखनऊ के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) में वैज्ञानिकों ने भविष्य की जलवायु को लेकर एक नई संभावना जताई है। संस्थान में आयोजित ‘मंथन सत्र’ के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि करोड़ों साल पुराने जीवाश्मो
UP: लखनऊ के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) में वैज्ञानिकों ने भविष्य की जलवायु को लेकर एक नई संभावना जताई है। संस्थान में आयोजित ‘मंथन सत्र’ के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मेल से जलवायु परिवर्तन का पहले से कहीं अधिक सटीक अंदाजा लगाया जा सकेगा।
जीवाश्म और AI का मेल कैसे करेगा काम?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राचीन पौधों और जीवों के जीवाश्मों में पृथ्वी के पुराने मौसम की जानकारी छिपी होती है। जब इस डेटा को AI की आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जाएगा, तो आने वाले समय में मौसम और जलवायु में होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। इससे जलवायु परिवर्तन के जोखिमों का पता लगाने में मदद मिलेगी।
क्या है बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP)?
BSIP भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत काम करने वाला एक स्वायत्त संगठन है। इसकी स्थापना 1946 में प्रोफेसर बीरबल साहनी ने की थी। यह संस्थान मुख्य रूप से पौधों के जीवाश्मों, पृथ्वी के इतिहास और पुरा-जलवायु के अध्ययन पर काम करता है। यह संस्थान आर्कटिक और अंटार्कटिका जैसे क्षेत्रों में भी रिसर्च करता है।
जलवायु पूर्वानुमान में AI की भूमिका
आजकल AI का इस्तेमाल मौसम की भविष्यवाणी को सटीक बनाने के लिए किया जा रहा है। शोधकर्ता अब जलवायु मॉडल और डेटा को मिलाकर यह देख रहे हैं कि एक देश में होने वाला मौसम का बदलाव दूसरे देशों को कैसे प्रभावित करेगा। लखनऊ में जनवरी 2026 में हुए एआई इम्पैक्ट सम्मेलन में भी जलवायु लचीलेपन और शासन में AI के इस्तेमाल पर चर्चा हुई थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बीरबल साहनी संस्थान में वैज्ञानिकों ने क्या दावा किया है?
संस्थान के विशेषज्ञों ने कहा है कि करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों और AI के संयोजन से भविष्य की जलवायु और जलवायु परिवर्तन का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
BSIP संस्थान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह संस्थान पौधों के जीवन की उत्पत्ति, विकास और भूवैज्ञानिक चिंताओं के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन की खोज और पृथ्वी के इतिहास के अध्ययन पर काम करता है।