Lucknow में ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला शुरू, युवाओं को सिखाया जाएगा पर्यावरण संरक्षण और बौद्ध दर्शन

Lucknow: राजधानी लखनऊ में नई पीढ़ी को पर्यावरण और बौद्ध दर्शन के प्रति जागरूक करने के लिए ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला की शुरुआत हुई है। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद युवाओं और विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब लाना और उन

Lucknow: राजधानी लखनऊ में नई पीढ़ी को पर्यावरण और बौद्ध दर्शन के प्रति जागरूक करने के लिए ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला की शुरुआत हुई है। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद युवाओं और विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब लाना और उन्हें जीवन के सही मूल्यों से जोड़ना है। इस पहल को युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे पूर्व प्रधान Sandeep Singh Rinku ने इस कोशिश की काफी तारीफ की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति समझ विकसित करने के लिए यह एक प्रेरणादायक प्रयास है। लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित सम्राट अशोक बुद्ध विहार और भिक्खुनी केंद्र, मवई पड़ियाना में इस सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन भंते शीलरतन ने किया।

यह आयोजन केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि जून 2026 से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में चलाया जा रहा है। अंबेडकरनगर के B.N.K.B. P.G. कॉलेज और बस्ती के युवा चेतना पुस्तकालय में भी ऐसी ही कार्यशालाएं आयोजित की गईं। बस्ती में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. नवीन सिंह ने ‘वृक्ष लगाओ, जीवन बचाओ’ का संदेश दिया और बताया कि पेड़ धरती की शान और सभी जीवों के लिए वरदान हैं।

इस पूरी मुहिम में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ और उत्तर प्रदेश का संस्कृति विभाग शामिल है। कार्यशाला संयोजक डॉ. शशांक मिश्र ने बताया कि इसका उद्देश्य बौद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। वहीं, बाबा बरुआ दास जी और प्रो. शुचिता पांडे ने इसे शांति, विवेक और पालि भाषा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।