Lucknow में ‘नीले कैप्सूल’ का बढ़ता क्रेज, दवा व्यापारियों ने CM योगी से मांगी जांच
Lucknow: लखनऊ में इन दिनों नीले कैप्सूल के जरिए नशा करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे चिंतित होकर लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि इन कैप्सूलों
Lucknow: लखनऊ में इन दिनों नीले कैप्सूल के जरिए नशा करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे चिंतित होकर लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि इन कैप्सूलों की बिक्री, सप्लाई और इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए क्योंकि यह मामला अब युवाओं के भविष्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब 28 जुलाई 2026 को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने कार्रवाई करते हुए करीब 5 लाख रुपये के नीले कैप्सूल जब्त किए। यह कार्रवाई कोडीन सिरप रैकेट के खुलासे के बाद हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक ये कैप्सूल असल में स्पाजमो प्रॉक्सीवान, प्रिगाबालिन, गैबापेंटिन और ट्रामाडोल जैसी दवाएं हैं। इनका इस्तेमाल दर्द, मिर्गी या तंत्रिका संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए होता है, लेकिन अब युवा इन्हें नशे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
इन कैप्सूलों के बढ़ते चलन की वजह यह है कि इन्हें ले जाना आसान है, इनमें शराब जैसी गंध नहीं होती और ये सस्ते मिलते हैं। कई बार ये बिना डॉक्टर के पर्चे के भी मिल जाते हैं। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि इन दवाओं की बिक्री में अचानक हुई बढ़ोतरी संदिग्ध है। उन्होंने मांग की है कि इनके निर्माण और वितरण के चैनलों की जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
एसोसिएशन ने यह भी साफ किया है कि जांच के दौरान ईमानदार व्यापारियों को बदनाम न किया जाए। उन्होंने नमूना जांच प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है क्योंकि कई बार लैब रिपोर्ट में दवाएं सही पाई जाती हैं जबकि शुरुआत में उन्हें नकली बताया जाता है।
FSDA अधिकारियों का कहना है कि वे केवल दवाएं जब्त नहीं कर रहे बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रहे हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। दिसंबर 2025 में उन्होंने निर्देश दिए थे कि सुपर-स्टॉकिस्टों और थोक विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए और दोषियों की संपत्ति कुर्क की जाए। राज्य में नशाखोरी रोकने के लिए 2022 में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन भी किया गया था।