UP : लखनऊ के बीकेटी इलाके से पुलिस ने एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी अरूप बख्शी पिछले कई सालों से फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे कागजात बनवाकर भारत में रह रहा था। वह न केवल यहाँ अवैध रूप से रह रहा थ
UP : लखनऊ के बीकेटी इलाके से पुलिस ने एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी अरूप बख्शी पिछले कई सालों से फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे कागजात बनवाकर भारत में रह रहा था। वह न केवल यहाँ अवैध रूप से रह रहा था, बल्कि लोगों का इलाज करने के लिए एक फर्जी क्लीनिक भी चला रहा था।
अरूप बख्शी कौन है और कैसे पकड़ा गया
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान 37 वर्षीय अरूप बख्शी के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के नरैल जिले का रहने वाला है। उसे 20 मई 2026 को दोपहर करीब 2:10 बजे किसान पथ पर विपश्यना ध्यान केंद्र फ्लाईओवर के नीचे से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके पास से एक फर्जी पहचान पत्र, ओप्पो मोबाइल और कुछ नकदी बरामद की है।
फर्जी पहचान और अवैध काम का तरीका
जांच में पता चला कि अरूप 2012 में अवैध तरीके से भारत आया था। उसने खुद को हिंदू दिखाने के लिए माथे पर टीका लगाया, हाथ में कलावा बांधा और अपने क्लीनिक में मंदिर भी बनाया था। वह लखनऊ के अस्ती रोड इलाके में ‘बंगाली चांदसी क्लीनिक’ नाम से एक अवैध सेंटर चला रहा था, जहाँ उसने कई लोगों के हाइड्रोसील के ऑपरेशन भी किए।
बरामद दस्तावेज और कानूनी कार्रवाई
| विवरण |
जानकारी |
| बनाए गए फर्जी दस्तावेज |
आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक और भारतीय पासपोर्ट (2016) |
| खरीदी गई संपत्ति |
फरवरी 2019 में बीकेटी के मामपुर बाना गांव में 800 वर्ग फुट जमीन |
| दर्ज मुकदमे की धाराएं |
IPC 419, 420, 467, 468, 471 और विदेशियों विषयक अधिनियम की धारा 14(ग) |
बीकेटी के एसीपी विकास पांडेय ने बताया कि आरोपी ने अपनी गलती कबूल कर ली है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि उसे फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेज बनाने में किसने मदद की और पासपोर्ट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में चूक कहाँ हुई।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अरूप बख्शी लखनऊ में क्या काम कर रहा था
अरूप बख्शी लखनऊ के अस्ती रोड इलाके में ‘बंगाली चांदसी क्लीनिक’ नाम से एक अवैध क्लीनिक चला रहा था और लोगों के ऑपरेशन भी करता था।
आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने के लिए क्या किया
उसने खुद को हिंदू दिखाने के लिए माथे पर टीका लगाया, हाथ में कलावा बांधा और क्लीनिक में मंदिर बनाया था ताकि किसी को उस पर शक न हो।