UP : लखनऊ में एक परिवार को अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र पाने के लिए 13 साल तक लंबा इंतजार करना पड़ा। बच्चे के जन्म के समय 21 दिनों के भीतर पंजीकरण न कराने की एक छोटी सी चूक अब बड़ी मुश्किल बन गई। अब जाकर बच्चे को यह जरू
UP : लखनऊ में एक परिवार को अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र पाने के लिए 13 साल तक लंबा इंतजार करना पड़ा। बच्चे के जन्म के समय 21 दिनों के भीतर पंजीकरण न कराने की एक छोटी सी चूक अब बड़ी मुश्किल बन गई। अब जाकर बच्चे को यह जरूरी दस्तावेज मिला है, लेकिन इसके लिए परिवार को काफी भागदौड़ और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा।
जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के नियम क्या हैं
नियमों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में किसी भी बच्चे के जन्म के 21 दिनों के भीतर ग्राम पंचायत सचिव या नगर निगम के सक्षम अधिकारी के पास पंजीकरण कराना जरूरी है। अगर इस समय सीमा के अंदर आवेदन किया जाता है, तो जन्म प्रमाणपत्र मुफ्त और आसानी से मिल जाता है। लेकिन अगर इसमें देरी होती है, तो प्रक्रिया जटिल हो जाती है और जुर्माना भी देना पड़ता है।
देरी होने पर कैसे बनता है सर्टिफिकेट
अगर जन्म के 21 दिन बाद लेकिन एक साल के भीतर आवेदन करते हैं, तो जिला रजिस्ट्रार की अनुमति और फीस की जरूरत होती है। लेकिन अगर एक साल से ज्यादा की देरी हो गई है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। ऐसी स्थिति में फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना प्रमाणपत्र नहीं मिलता। इसमें नगर निगम की जांच रिपोर्ट और एसडीएम (SDM) की मंजूरी के साथ एक हलफनामा (Affidavit) भी देना पड़ता है।
किन कामों के लिए जरूरी है यह दस्तावेज
2023 के नए नियमों के बाद जन्म प्रमाणपत्र अब जीवन के लगभग हर मोड़ पर अनिवार्य हो गया है। स्कूल में एडमिशन, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने, सरकारी नौकरी, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, पासपोर्ट और जमीन की रजिस्ट्री जैसे कामों के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि आधार कार्ड को जन्म तिथि के प्रमाण के तौर पर मान्य नहीं माना जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जन्म प्रमाणपत्र के लिए पंजीकरण की समय सीमा क्या है
जन्म के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इस समय में पंजीकरण कराने पर प्रमाणपत्र आसानी से और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिल जाता है।
क्या आधार कार्ड को जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं
नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार और UIDAI के अनुसार आधार कार्ड केवल डिजिटल पहचान का प्रमाण है, इसे जन्म तिथि के आधिकारिक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।