Lucknow-Bahraich हाईवे पर रोड मार्किंग का काम तेज, जल्द डिजिटल हाईवे बनेगा यह रास्ता

UP/Barabanki: लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रोड मार्किंग का काम तेजी से चल रहा है। करीब 50 किलोमीटर के क्षेत्र में थर्मोप्लास्टिक पेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि रात के समय और

UP/Barabanki: लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रोड मार्किंग का काम तेजी से चल रहा है। करीब 50 किलोमीटर के क्षेत्र में थर्मोप्लास्टिक पेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि रात के समय और धुंध में ड्राइवरों को साफ संकेत मिल सकें। इस हाईवे पर लगातार बढ़ रहे हादसों को रोकने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

इस हाईवे को लेकर एक बड़ी योजना भी तैयार है। केंद्र सरकार ने बाराबंकी से बहराइच तक 101.515 किलोमीटर लंबे 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल हाईवे (NH-927) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 6969.04 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली है। इस नए हाईवे के बनने से यात्रा का समय करीब एक घंटा कम हो जाएगा और लोगों को तेज मोड़ों और भीड़भाड़ से राहत मिलेगी।

खास बात यह है कि इसे उत्तर प्रदेश का पहला डिजिटल हाईवे बनाया जाएगा। सुरक्षा के लिए इसमें कई आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है:

सुविधा विवरण
ट्रैफिक मॉनिटरिंग लगभग 50 CCTV कैमरे और स्पीड रडार
सूचना प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड और ऑटोमैटिक चेतावनी सिस्टम
इमरजेंसी मदद हर दो किलोमीटर पर आपातकालीन संचार बूथ
कनेक्टिविटी सड़क किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी
रोड सेफ्टी बेहतर लाइटिंग और रिफ्लेक्टिव रोड साइन

NHAI ने जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया है। हालांकि, वन विभाग से NOC मिलने में कुछ देरी हो रही है क्योंकि रास्ते में करीब नौ हजार पेड़ आ रहे हैं। उम्मीद है कि निर्माण कार्य अक्टूबर 2026 से शुरू होगा और अक्टूबर 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य है कि अक्टूबर 2027 तक बाराबंकी से बहराइच के बीच का मुख्य रास्ता तैयार हो जाए।

हाल के दिनों में इस हाईवे पर हादसों की संख्या बढ़ी है, जिससे स्थानीय लोग काफी चिंतित हैं। पिछले एक महीने में करीब 42 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके कारण इसे मौत का गलियारा भी कहा जाने लगा है। प्रशासन का मानना है कि रोड मार्किंग और डिजिटल सिस्टम लागू होने से रफ्तार पर नियंत्रण रहेगा और दुर्घटनाएं कम होंगी।