Lucknow में बड़े मंगल भंडारे का समापन, 8 मंगलवार तक चला आयोजन; प्लास्टिक मुक्त रहे 550 से ज्यादा भंडारे
Lucknow/Lucknow : राजधानी लखनऊ में बड़े मंगल के पारंपरिक भंडारे इस बार केवल आस्था तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ये सामाजिक एकता और पर्यावरण बचाने की एक बड़ी मिसाल बने। इस साल ज्येष्ठ महीने में आठ मंगलवार पड़ने का दुर्लभ संयोग
Lucknow/Lucknow : राजधानी लखनऊ में बड़े मंगल के पारंपरिक भंडारे इस बार केवल आस्था तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ये सामाजिक एकता और पर्यावरण बचाने की एक बड़ी मिसाल बने। इस साल ज्येष्ठ महीने में आठ मंगलवार पड़ने का दुर्लभ संयोग बना, जिसके चलते 5 मई से 23 जून 2026 तक लगातार आयोजन हुए। अंतिम मंगलवार 23 जून को शहर भर में भारी उत्साह देखा गया।
नगर निगम लखनऊ (LMC) ने इस बार व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया था। आयोजकों को हेल्पलाइन 1533 या ‘Lucknow One’ ऐप के जरिए 24 घंटे पहले सूचना देनी पड़ी ताकि सफाई और पानी का इंतजाम समय पर हो सके। नगर निगम ने ‘जीरो वेस्ट’ अभियान चलाया और सिंगल यूज प्लास्टिक व थर्माकोल के इस्तेमाल पर रोक लगाई। इसके बदले पत्तल, मिट्टी के कुल्हड़ और स्टील के बर्तनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया।
मंगलमन संस्था की शिप्रा पाठक ने बताया कि इस दौरान 8 लाख हरे कटोरे, 4 लाख हरी प्लेटें, 1 लाख लकड़ी के चम्मच और 1 लाख पौधे बांटे गए। प्रयागराज महाकुंभ की तर्ज पर ‘बर्तन बैंक’ बनाए गए, जिससे 550 से ज्यादा भंडारे पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त रहे। वहीं, संस्था के प्रशांत भाटिया के मुताबिक इस आयोजन का आर्थिक प्रभाव 150 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिससे बिना सरकारी मदद के स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला।
आरएसएस पर्यावरण विभाग के गोपाल आर्य और रिटायर्ड आईएएस अनीता भटनागर जैन ने भी पर्यावरण नियमों के पालन और शोर कम रखने पर जोर दिया। इस आयोजन में मेयर सुषमा खरकवाल, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने हिस्सा लिया। आचार्य कमल मिश्रा ने बताया कि इस साल आठ मंगलवार का होना भगवान हनुमान की ‘अष्ट सिद्धियों’ का प्रतीक माना गया।
| पहल/सुविधा | संख्या/विवरण |
|---|---|
| कुल मंगलवार आयोजन | 8 (5 मई से 23 जून) |
| प्लास्टिक मुक्त भंडारे | 550 से अधिक |
| वितरित हरे कटोरे | 8 लाख |
| वितरित हरी प्लेटें | 4 लाख |
| वितरित पौधे/चम्मच | प्रत्येक 1 लाख |
| अनुमानित आर्थिक प्रभाव | 150 करोड़ रुपये से ज्यादा |