UP : लखनऊ में सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। STF ने आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के एक और सदस्य चक्रशेरू को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अपात्र लोगों के फर्जी कार्ड
UP : लखनऊ में सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। STF ने आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के एक और सदस्य चक्रशेरू को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अपात्र लोगों के फर्जी कार्ड बनाकर सरकार के करोड़ों रुपये हड़प रहा था।
कैसे होता था फर्जी आयुष्मान कार्ड का खेल?
यह गिरोह एक अवैध पोर्टल का इस्तेमाल करता था जिससे आधार ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन को बायपास किया जाता था। आरोपी अपात्र लोगों को असली लाभार्थियों की परिवार आईडी में जोड़ देते थे। इसके बाद सरकारी एजेंसी (ISA और SHA) के अंदरूनी लोगों की मदद से इन फर्जी आवेदनों को मंजूरी दिलाई जाती थी। आरोपी प्रति कार्ड 700 से 800 रुपये वसूलते थे और अप्रूवल के लिए अलग से पैसे लेते थे।
गिरफ्तारी और बरामद सामान की पूरी जानकारी
STF की साइबर यूनिट और लखनऊ साइबर क्राइम थाने की टीम ने 2 जून 2026 को बुद्धेश्वर के पारा इलाके से चक्रशेरू उर्फ अभिषेक को पकड़ा। उसके पास से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण मिले हैं।
| बरामद सामान |
विवरण |
| इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस |
लैपटॉप, 2 CPU, मॉनिटर, प्रिंटर, वेबकैम, थंब स्कैनर |
| दस्तावेज |
आधार कार्ड, पैन कार्ड, CSC आईडी कार्ड, फर्जी डिजिटल रिकॉर्ड |
| अन्य |
एक कार, एक मुहर और 1,320 रुपये नकद |
अब आगे क्या होगी कार्रवाई?
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि इस गिरोह के पास यूपी के सभी 75 जिलों का परिवार आईडी डेटा था। अब बरामद लैपटॉप और अन्य उपकरणों की फोरेंसिक जांच होगी ताकि नेटवर्क के बाकी लोगों का पता लगाया जा सके। इस मामले में पहले ही 9 सदस्य जेल जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश सरकार अब इन जालसाजों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आयुष्मान कार्ड फर्जीवाड़े में अब तक कितने लोग पकड़े गए हैं?
इस संगठित गिरोह के अब तक कुल 10 सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें चक्रशेरू के अलावा मास्टरमाइंड चंद्रभान वर्मा और राजेश मिश्रा जैसे 9 अन्य लोग शामिल हैं।
फर्जी कार्ड बनवाने के लिए गिरोह कितने पैसे ले रहा था?
गिरोह के सदस्य प्रति कार्ड 700 से 800 रुपये वसूलते थे, जबकि कार्ड के अप्रूवल (मंजूरी) के लिए अलग से अतिरिक्त राशि ली जाती थी।