UP: लखनऊ के अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। यहाँ डॉक्टरों ने 5 महीने की एक मासूम बच्ची के दिल में जन्म से मौजूद छेद को बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सफलतापूर्वक बंद कर उसकी जान बचाई। इस इलाज के बाद
UP: लखनऊ के अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। यहाँ डॉक्टरों ने 5 महीने की एक मासूम बच्ची के दिल में जन्म से मौजूद छेद को बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सफलतापूर्वक बंद कर उसकी जान बचाई। इस इलाज के बाद बच्ची की हालत अब स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।
बिना ओपन हार्ट सर्जरी के कैसे हुआ इलाज
इस प्रक्रिया में डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। लखनऊ के अपोलो मेडिक्स अस्पताल में आमतौर पर कीहोल तकनीक या मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (MICS) का उपयोग होता है। इसमें छाती की हड्डी को काटने के बजाय सिर्फ 3 सेंटीमीटर के छोटे चीरे से ऑपरेशन किया जाता है। कुछ मामलों में कैथेटर के जरिए पैरों की नस से डिवाइस पहुंचाकर भी दिल का छेद बंद किया जाता है।
इस तकनीक के क्या हैं फायदे
बिना ओपन हार्ट सर्जरी वाली इन तकनीकों से मरीजों को कई बड़े फायदे मिलते हैं। इसमें खून कम बहता है और मरीज को दर्द भी बहुत कम होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि रिकवरी बहुत तेजी से होती है और कई बार मरीज एक या दो दिन में ही घर जाने लायक हो जाते हैं। अपोलो मेडिक्स के सीईओ डॉ. मयंक सोमानी के मुताबिक, ऐसी सुविधाओं से अब यूपी के मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
लखनऊ में पहले भी हुए हैं ऐसे सफल ऑपरेशन
लखनऊ के अस्पतालों में बच्चों के दिल के इलाज के लिए कई सफल केस सामने आए हैं। मार्च 2026 में अपोलो मेडिक्स में 4 साल के बच्चे की कीहोल तकनीक से सर्जरी हुई थी। इसके अलावा डॉ. राहुल भूषण और डॉ. भरत दुबे जैसे विशेषज्ञों ने कई बच्चों के जन्मजात हृदय रोगों का इलाज किया है। टेंडर पाम अस्पताल में भी डॉ. गौतम की टीम ने डिवाइस क्लोजर के जरिए बच्चों के दिल के छेद (VSD) को ठीक किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कीहोल सर्जरी और ओपन हार्ट सर्जरी में क्या अंतर है
ओपन हार्ट सर्जरी में छाती की हड्डी काटी जाती है, जबकि कीहोल सर्जरी (MICS) में सिर्फ 3 सेमी के छोटे चीरे से ऑपरेशन होता है। इससे दर्द कम होता है और मरीज जल्दी ठीक होता है।
क्या दिल के सभी छेद बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकते हैं
डॉ. गौतम (टेंडर पाम अस्पताल) के अनुसार, ASD, VSD या PDA जैसे जन्मजात हृदय रोगों को कई मामलों में बिना बड़ी सर्जरी के डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया से ठीक किया जा सकता है।