Lucknow अग्निकांड में 15 की मौत, CM योगी ने 4 अधिकारियों को किया सस्पेंड, बिल्डिंग मालिक समेत 4 गिरफ्तार

Lucknow: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। इस अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर 20 से 24 साल के युवा थे। हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों में क

Lucknow: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। इस अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर 20 से 24 साल के युवा थे। हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और शहर में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस दर्दनाक हादसे में सुखमनी नाम के एक युवक की मौत हुई, जिसने आग लगने के बाद अपने पिता को फोन कर बचाने की गुहार लगाई थी। इसके अलावा आदित्य, शाहजान और अन्य युवाओं की भी मौत की पुष्टि हुई है। घटना सोमवार दोपहर करीब 1:30 से 3:00 बजे के बीच हुई। जिस इमारत में आग लगी, वहां बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक थे, जबकि ऊपर की मंजिलों पर ‘लर्निंग स्पेस’ लाइब्रेरी और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ जैसे संस्थान चल रहे थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया और मंगलवार को अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर लखनऊ लौटे। उन्होंने KGMU और घटनास्थल का दौरा किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर लापरवाही बरतने वाले चार अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में जानकीपुरम के XEN गौरव कुमार, इंदिरा नगर फायर स्टेशन के FSSO कमलेन्द्र कुमार सिंह, AE अनिल कुमार और JE प्रमोद पांडे शामिल हैं।

सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। मामले की गहराई से जांच के लिए दो सदस्यीय SIT बना दी गई है, जिसे 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने भी घटना पर दुख जताया है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अलीगंज थाने में छह नामजद लोगों के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में यह बात सामने आई कि 2016 में इस बिल्डिंग के अवैध निर्माण को लेकर इसे गिराने का आदेश हुआ था, लेकिन बाद में उसे रद्द कर दिया गया। अब प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर निर्माण अवैध पाया गया तो बिल्डिंग पर बुलडोजर चलाया जाए।