Lucknow के अलीगंज अग्निकांड पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा विस्तृत जवाब; LDA उपाध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया
Lucknow/UP: अलीगंज अग्निकांड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में सरकार का गोलमोल जवाब स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने
Lucknow/UP: अलीगंज अग्निकांड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में सरकार का गोलमोल जवाब स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने सरकार और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर गहरी चिंता जताई है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार और आवास एवं विकास परिषद को फटकार लगाई। सरकार ने कोर्ट को बताया कि अग्नि सुरक्षा और भवन निर्माण नियमों के लिए एक SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) लगभग तैयार है। अदालत ने इसे अंतिम रूप देने और विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
हाई कोर्ट ने एक जरूरी सवाल यह भी उठाया कि उत्तर प्रदेश अग्नि एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 की धारा 26 के तहत 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों को अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र से छूट क्यों दी गई है। कोर्ट ने इस पर पुनर्विचार करने को कहा क्योंकि अलीगंज की घटना ऐसी ही एक इमारत में हुई थी।
वहीं दूसरी तरफ, 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बुलाया है और उन्हें अवमानना नोटिस भेजकर SIT रिपोर्ट लाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी शहरों में मास्टर प्लान और सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों का पालन न होने को राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा माना है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब LDA ने अलीगंज इलाके में 51 ऐसी अवैध इमारतों की पहचान की है जो भू-उपयोग नियमों का उल्लंघन कर रही हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है।
यह पूरा मामला 22 जून 2026 का है जब अलीगंज की एक तीन मंजिला इमारत में आग लगी थी और 15 लोगों की जान चली गई थी। यह इमारत कागजों में आवासीय थी लेकिन वहां व्यावसायिक काम हो रहा था। इस इमारत के बेसमेंट को हटाने के लिए 2016 में ही विध्वंस आदेश जारी किया गया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था।