Lucknow के अलीगंज अग्निकांड में 15 की मौत, जांच के दायरे में 5 PCS अधिकारी और 19 इंजीनियर

Lucknow: अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि इन लोगों की मौत आग से जलने की व

Lucknow: अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि इन लोगों की मौत आग से जलने की वजह से नहीं, बल्कि धुएं और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से दम घुटने के कारण हुई थी। घटना के चौथे दिन भी आसपास के जिलों से लोग घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जांच के लिए एक उच्चस्तरीय SIT का गठन किया है, जिसे 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी है। इस हादसे के बाद पूरे प्रदेश में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और शॉपिंग मॉल जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर में मानकों का उल्लंघन करने वाले 71 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है और 83 मालिकों को नोटिस जारी किया है। यह अभियान अगले तीन हफ्तों तक चलेगा।

जांच में अब बड़े अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। LDA के पांच PCS अधिकारी (डीके सिंह, अरविंद त्रिपाठी, विश्व भूषण मिश्र, संजय पांडेय और केएन राम) जांच के दायरे में आ गए हैं, जिन पर 2016 से अवैध निर्माणों को रोकने में लापरवाही का आरोप है। साथ ही LDA ने 19 दोषी इंजीनियरों की सूची भी SIT को सौंपी है। पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के भाई सुरेंद्र का नाम भी FIR में जोड़ दिया है और उनके करीबियों से पूछताछ की जा रही है।

यह बात भी सामने आई है कि जिस बिल्डिंग में एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर चल रहा था, उसका नक्शा सिर्फ रहने (आवासीय उपयोग) के लिए पास हुआ था, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। साल 2016 में इस इमारत को गिराने का आदेश हुआ था, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। अब पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच कर रहे हैं कि वह आदेश वापस कैसे लिया गया और बिजली ऑडिट क्यों नहीं हुआ।