Lucknow के अलीगंज अग्निकांड में प्रेमी जोड़े की मौत, शादी की तैयारी के बीच हादसे ने छीनीं 15 जानें

Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान गई है, जिनमें एक प्रेमी जोड़ा नीलेश कुमार और अनामिका सामंत भी शामिल थे। दोनों एक ही कंपनी में काम क

Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान गई है, जिनमें एक प्रेमी जोड़ा नीलेश कुमार और अनामिका सामंत भी शामिल थे। दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे और जल्द ही शादी करने वाले थे, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने उनके सारे सपने राख कर दिए।

नीलेश और अनामिका ‘हेड हॉपर स्टूडियोज’ नामक 3डी आर्ट प्रोडक्शन कंपनी में काम करते थे। दोनों के परिवारों ने उनके रिश्ते को मंजूरी दे दी थी और नवंबर या दिसंबर 2026 में शादी तय हुई थी। अनामिका के माता-पिता पिछले हफ्ते ही कोलकाता से लखनऊ आए थे ताकि शादी की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके। वहीं नीलेश का परिवार भी अगले हफ्ते कोलकाता जाने वाला था। इस हादसे में अनामिका की चचेरी बहन सोमिल्या की भी मौत हो गई, जो उसी ऑफिस में काम करती थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जांच टीम में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जिस इमारत में आग लगी थी, वहां बिजली का लोड स्वीकृत 20 किलोवाट की सीमा से ज्यादा 34 किलोवाट था। बताया जा रहा है कि ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक पेट शॉप में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी।

इस मामले में अब तक छह लोगों पर केस दर्ज किया गया है और चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लापरवाही बरतने के आरोप में LDA, अग्निशमन और विद्युत विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। जांच में यह भी पता चला है कि 2016 में इस इमारत के अवैध निर्माण को गिराने का आदेश हुआ था, जिसे दो महीने बाद ही रद्द कर दिया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का दौरा किया और KGMU अस्पताल में भर्ती घायलों का हाल जाना।