Lucknow के अलीगंज अग्निकांड में बड़ा खुलासा, पैसों के दम पर रुका था अवैध बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण
Lucknow: अलीगंज में एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली और कई लोग घायल हो गए। इस हादसे के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के रिकॉर्ड से एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। आरोप है कि समाजवादी पार
Lucknow: अलीगंज में एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली और कई लोग घायल हो गए। इस हादसे के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के रिकॉर्ड से एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। आरोप है कि समाजवादी पार्टी सरकार के समय में पैसों के दम पर इस अवैध इमारत को गिराने की कार्रवाई रुकवा दी गई थी।
रिकॉर्ड के मुताबिक, यह बिल्डिंग मूल रूप से 1980 में आवासीय उपयोग के लिए आवंटित की गई थी और 2014 में भी इसका नक्शा घर के लिए ही पास हुआ था। लेकिन बाद में इसे अवैध तरीके से कमर्शियल बनाया गया और यहाँ एनिमेशन व कोचिंग सेंटर चलाए जाने लगे। साल 2016 में LDA ने इसे गिराने का आदेश जारी किया था, लेकिन दो महीने के भीतर ही इस आदेश को रद्द कर दिया गया। अब इसी बात की जांच हो रही है कि आखिर किन अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर इस कार्रवाई को रोका।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। पुलिस ने इमारत के मालिक वीरेंद्र प्रताप शुक्ला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही LDA, बिजली विभाग और अग्निशमन विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की गहराई से जांच के लिए एक SIT और LDA की पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है।
| प्रमुख विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मृतकों की संख्या | 15 लोग |
| घायलों की संख्या | 9 लोग |
| मुख्य आरोपी | वीरेंद्र प्रताप शुक्ला व अन्य |
| निलंबित अधिकारी | 4 अधिकारी |
| मुआवजा राशि | मृतकों के परिवार को 5 लाख, घायलों को 50 हजार |
| जांच टीम | SIT और 5 सदस्यीय LDA कमेटी |
जांच में पता चला है कि इमारत पूरी तरह कांच से ढकी थी और इसमें न तो कोई इमरजेंसी एग्जिट था और न ही आग बुझाने का कोई सिस्टम। छत का रास्ता बंद होने की वजह से बचाव दल को दीवार तोड़कर अंदर घुसना पड़ा। लोगों की मौत मुख्य रूप से ऑक्सीजन की कमी और धुएं के कारण दम घुटने से हुई। LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इमारत को फिर से गिराने का नोटिस जारी कर दिया गया है और दोषी इंजीनियरों पर कानूनी कार्रवाई होगी। सरकार अब ड्रोन के जरिए शहर की अन्य अवैध इमारतों की मैपिंग करने की योजना बना रही है।