Lucknow में अग्निकांड के बाद अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर, 20 से ज्यादा अधिकारी दोषी
Lucknow: अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने सख्त कदम उठाए हैं। जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी थी, उसे गिराने के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आया
Lucknow: अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने सख्त कदम उठाए हैं। जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी थी, उसे गिराने के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आया है कि यह बिल्डिंग आवासीय नक्शे के उलट व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी।
यह हादसा 22 जून 2026 को हुआ था, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी। मरने वालों में ज्यादातर 20 से 27 साल के छात्र थे। हादसे के बाद LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने एक स्पेशल जांच कमेटी बनाई, जिसकी रिपोर्ट में भारी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में 18 से 23 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं, जिनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए शासन को गोपनीय रिपोर्ट भेजी गई है।
दोषियों की लिस्ट में तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव और पांच जोनल अधिकारी भी शामिल हैं। पता चला है कि साल 2016 में इस अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन महज दो महीने बाद उसे रद्द कर दिया गया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस लापरवाही के लिए पिछली सपा सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार को जिम्मेदार बताया है।
इस मामले में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल खुला है। मुख्यमंत्री को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, LDA अधिकारियों की मिलीभगत से शहर में कई अवैध अपार्टमेंट, होटल और कमर्शियल बिल्डिंग बन गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर में 1000 से ज्यादा अवैध निर्माण और 2000 ध्वस्तीकरण आदेश लंबित हैं, जिन पर अब तक कोई एक्शन नहीं हुआ।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गिरफ्तार आरोपी | 4 लोग (कुल 6 नामजद) |
| निलंबित अधिकारी | 4 (LDA, बिजली और अग्निशमन विभाग) |
| दोषी अधिकारी/इंजीनियर | 18 से 23 |
| मृतकों की संख्या | 15 (ज्यादातर छात्र) |
| मुख्य लापरवाही | फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और बायोमेट्रिक लॉक |
जांच में यह भी पाया गया कि इमारत की तीसरी मंजिल पर एक प्राइवेट लाइब्रेरी थी, जहां छात्र पढ़ाई करते थे। सुरक्षा के नाम पर मुख्य दरवाजा बायोमेट्रिक लॉक से बंद रहता था और बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था, जिसकी वजह से छात्र बाहर नहीं निकल पाए। इसके अलावा, उस इलाके के अवर अभियंताओं और सुपरवाइजरों की तैनाती का कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला है।