Lucknow के अलीगंज अग्निकांड में बड़ा खुलासा, फ्रीजर के शॉर्ट सर्किट से लगी थी आग, 15 लोगों की मौत

Lucknow: अलीगंज के पुरनिया इलाके में एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली। जांच में सामने आया है कि यह हादसा पेट शॉप के वेयरहाउस में रखे एक फ्रीजर के शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ। पहली मं

Lucknow: अलीगंज के पुरनिया इलाके में एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली। जांच में सामने आया है कि यह हादसा पेट शॉप के वेयरहाउस में रखे एक फ्रीजर के शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ। पहली मंजिल पर कुत्ते-बिल्ली के सामान का गोदाम था, जहां आग तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरी इमारत चपेट में आ गई।

आग इतनी भयानक थी कि लपटों की वजह से एसी कंप्रेसर, आउटडोर यूनिट और वहां खड़ी बाइकों के फ्यूल टैंक फट गए, जिससे आग और ज्यादा विकराल हो गई। इस हादसे में मरने वालों में ज्यादातर युवा छात्र और कर्मचारी थे। कई लोगों की मौत जलने के बजाय दम घुटने से हुई। पेट शॉप से करीब 10 बिल्लियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन 25 से 30 जानवरों के मारे जाने की खबर है।

जांच में यह भी पता चला कि इस इमारत में न तो फायर एनओसी (NOC) थी और न ही कोई सुरक्षा उपकरण लगे थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन के लिए इस्तेमाल किया गया एनओसी फर्जी पाया गया है। 2016 में इसी फर्जी कागज के दम पर घरेलू कनेक्शन को कमर्शियल में बदला गया था। पुलिस और एसआईटी अब पिछले 10 साल के निर्माण रिकॉर्ड और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है।

इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, एनिमेशन सेंटर संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, सुरेश साहू और पेट शॉप संचालक रामकृष्ण उपाध्याय शामिल हैं। पुलिस ने भवन स्वामी के भाई सुरेंद्र का नाम भी एफआईआर में जोड़ा है।

अधिकारी/विभाग की गई कार्रवाई/सिफारिश
LDA उपाध्यक्ष 19 इंजीनियरों और 6 पीसीएस अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 50 हजार की मदद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मृतकों के परिवार को 2 लाख और घायलों को 50 हजार की मदद
LDA प्रशासन शहर के 71 प्रतिष्ठानों को सील किया, 83 मालिकों को नोटिस

मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल ने एसआईटी के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। वहीं, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने एक कार्यकारी अभियंता के निलंबन पर सवाल उठाए हैं और तकनीकी जांच की मांग की है। इस घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पूरे शहर में अभियान शुरू किया है जो तीन सप्ताह तक चलेगा।