Lucknow के अलीगंज अग्निकांड में नया मोड़, फर्जी NOC बनवाने के आरोप में भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला पर एक और FIR

Lucknow: अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी। अब इस मामले में भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है क्योंकि उन्हों

Lucknow: अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी। अब इस मामले में भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है क्योंकि उन्होंने बिजली सुरक्षा के लिए फर्जी NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) तैयार करवाया था।

इलेक्ट्रिकल सेफ्टी विभाग की आंतरिक जांच में यह बात सामने आई कि वीरेंद्र शुक्ला ने जो NOC पेश किया था, वह पूरी तरह फर्जी था। यह दस्तावेज 2016 का बताया गया था, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में उस डिस्पैच नंबर पर कोई दूसरा कागज दर्ज था। साथ ही, तत्कालीन सहायक निदेशक P.K. Nigam के हस्ताक्षर, कागज का डिजाइन और फॉन्ट भी सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। इस धोखाधड़ी के बाद सहायक निदेशक आलोक शुक्ला ने वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। अलीगंज पुलिस के इंस्पेक्टर ध्रुव कुमार ने बताया कि जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

यह पूरी इमारत मूल रूप से रहने के लिए बनाई गई थी, लेकिन इसे अवैध तरीके से कमर्शियल इस्तेमाल में बदल दिया गया था। यहां कोचिंग सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, पेट क्लिनिक, गेमिंग जोन और आईटी ऑफिस चल रहे थे। जांच में पता चला कि बिल्डिंग में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। यहां न तो कोई धुआं निकालने का सिस्टम था और न ही आपातकालीन निकास। सिर्फ एक सीढ़ी होने की वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई कि सभी 15 लोगों की मौत जलने से नहीं, बल्कि धुएं के कारण दम घुटने से हुई थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर कड़ा रुख अपनाते हुए मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया था। उन्होंने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। SIT के अधिकारी अमृत अभिजात और प्रवीण कुमार ने मौके का दौरा किया और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। 22 जून को चार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था, जिसके बाद 28 जून को LDA और नगर निगम के चार और अधिकारियों, जिनमें सहायक अभियंता संजय शुक्ला और अधीक्षण अभियंता शिवेंद्र शुक्ला शामिल हैं, को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा 12 रिटायर्ड इंजीनियरों पर भी कार्रवाई चल रही है। LDA ने वीरेंद्र शुक्ला और उनके भाई द्वारा बनाई गई एक और चार मंजिला अवैध कमर्शियल बिल्डिंग को सील कर दिया है। फिलहाल सह-मालिक सुरेंद्र प्रताप शुक्ला फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।