Lucknow में भीषण आग से 15 लोगों की मौत, कोचिंग सेंटर में डिजिटल लॉक बना काल

Lucknow: अलीगंज के सेक्टर डी में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लग गई। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई और 9 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। जिस इमारत में यह हादसा हुआ वहां एक कोचिंग सेंटर और एक पे

Lucknow: अलीगंज के सेक्टर डी में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लग गई। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई और 9 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। जिस इमारत में यह हादसा हुआ वहां एक कोचिंग सेंटर और एक पेट शॉप चल रही थी। आग इतनी भयानक थी कि कई युवाओं को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।

हादसे में जान गंवाने वाले ज्यादातर लोग 19 से 30 साल के बीच के थे। मरने वालों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें से कुछ लोग पश्चिम बंगाल, हरियाणा और मध्य प्रदेश से रोजगार और ट्रेनिंग के लिए लखनऊ आए थे। KGMU अस्पताल के मुताबिक कुल 22 लोगों को यहां लाया गया था, जिनमें से 15 को मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों की पहचान सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुछा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज शाह, शाहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमाल्या के रूप में हुई है।

शुरुआती जांच में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। कोचिंग सेंटर का दरवाजा डिजिटल लॉक से बंद था जिसे खोलने के लिए अंगूठे के निशान की जरूरत थी। आग लगते ही स्कैनर ने काम करना बंद कर दिया, जिससे अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए। इसके अलावा इमारत में बिजली का लोड भी क्षमता से ज्यादा था। यहां 20 किलोवाट का कनेक्शन था लेकिन लोड 34 किलोवाट तक पहुंच गया था। यह भी पता चला है कि 2016 में इस इमारत को अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीएम रिलीफ फंड से मृतकों के परिवार को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। सरकार ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय SIT बना दी है, जिसे सात दिन में रिपोर्ट देनी होगी।

प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। इमारत के मालिक समेत छह लोगों पर केस दर्ज किया गया है और चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण, अग्निशमन और विद्युत विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। अब यूपी के कई जिलों में भवनों की अग्नि सुरक्षा जांच के लिए एक हफ्ते का विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।