Lucknow अग्निकांड: 15 लोगों की मौत के बाद मालिक का आपराधिक इतिहास आया सामने, पेपर लीक से था जुड़ाव

Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में सोमवार, 22 जून 2026 को एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगी थी। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई। अब इस मामले में इमारत के मालिकों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है,

Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में सोमवार, 22 जून 2026 को एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगी थी। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई। अब इस मामले में इमारत के मालिकों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

जांच में पता चला है कि इमारत के मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और सह-मालिक सुरेंद्र शुक्ला का इतिहास विवादों से भरा रहा है। सह-मालिक सुरेंद्र शुक्ला का नाम 2015 के CPMT पेपर लीक मामले में आया था। उन पर अपनी बेटी को परीक्षा पास कराने के लिए साजिश रचने का आरोप था और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज हुई थी, हालांकि बाद में सबूतों की कमी से उन्हें बरी कर दिया गया था। वहीं, मालिक वीरेंद्र शुक्ला पर किसानों की जमीन सस्ते में खरीदने और सीलिंग की जमीन पर प्लॉटिंग करने के आरोप लगे हैं।

पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप और क्लीनिक संचालक रामकृष्ण उपाध्याय, गेमिंग जोन संचालक तुषांक कृष्णा जायसवाल और किराएदार सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला अभी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए एक SIT का गठन किया है। लापरवाही बरतने वाले चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जिनमें LDA के दो जूनियर इंजीनियर अनिल कुमार और प्रमोद पांडे, ऊर्जा विभाग के एक्सईएन गौरव कुमार और फायर स्टेशन के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह शामिल हैं।

इमारत की जांच में बड़ी गड़बड़ियां मिली हैं। यह बिल्डिंग 2014 में आवासीय नक्शे पर पास हुई थी, लेकिन इसे व्यावसायिक काम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। साल 2016 में LDA ने इसे अवैध बताकर गिराने का आदेश दिया था, लेकिन मालिकों की आपत्ति के बाद वह आदेश रद्द हो गया था। अब LDA ने एक बार फिर इसे ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया है।

अलीगंज थाने में BNS की धाराओं 110, 105, 125, 3(5) और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार ने भी मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि घोषित की है।