Lucknow के अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत, बिल्डिंग मालिक का पुराना विवादित रिकॉर्ड आया सामने

Lucknow/UP: राजधानी के अलीगंज इलाके में एक बिल्डिंग में भीषण आग लगने से 15 छात्रों की जान चली गई। इस हादसे के बाद अब बिल्डिंग के मालिकों और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले क

Lucknow/UP: राजधानी के अलीगंज इलाके में एक बिल्डिंग में भीषण आग लगने से 15 छात्रों की जान चली गई। इस हादसे के बाद अब बिल्डिंग के मालिकों और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं और कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

जांच में पता चला है कि जिस बिल्डिंग में यह हादसा हुआ, वह आवासीय नक्शे पर बनी थी लेकिन वहां व्यावसायिक काम चल रहे थे। बिल्डिंग में न तो फायर सिस्टम था और न ही इमरजेंसी एग्जिट। बताया जा रहा है कि ऑफिस का गेट थंब इंप्रेशन लॉक था, जिसकी वजह से आग लगने पर छात्र बाहर नहीं निकल पाए। हादसे से पहले उसी दिन सुबह एक छोटी आग लगी थी, जिसे बुझा दिया गया था लेकिन प्रशासन को इसकी सूचना नहीं मिली। LDA ने अब इस अवैध बिल्डिंग को गिराने का नोटिस जारी किया है।

बिल्डिंग के सह-स्वामी सुरेंद्र शुक्ल का पुराना विवादित रिकॉर्ड भी अब चर्चा में है। साल 2015 के CPMT पेपर लीक मामले में उनका नाम सामने आया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी बेटी को पास कराने के लिए पेपर लीक की साजिश रची थी। हालांकि, बाद में एसटीएफ की जांच में पर्याप्त सबूत न मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया था।

इस मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई इस प्रकार है:

विवरण जानकारी
गिरफ्तार व्यक्ति वीरेंद्र शुक्ल, तूशॉक कृष्णा जायसवाल, रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार शाहू
निलंबित अधिकारी गौरव कुमार (XEN), कमलेन्द्र कुमार सिंह (FSSO), अनिल कुमार और प्रमोद पांडे
जांच टीम दो सदस्यीय SIT और LDA की पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति
मुआवजा (CM) मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये
मुआवजा (PM) मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये
LDA एक्शन बिल्डिंग को ध्वस्त करने का नोटिस जारी

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित SIT को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी घटनास्थल का मुआयना किया है ताकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जा सके।