Lucknow अग्निकांड पर सियासी घमासान, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए इस हादसे को
Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए इस हादसे को पिछली सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि मौतों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
यह पूरा मामला 22 जून 2026 को अलीगंज की एक तीन मंजिला इमारत का है, जहां कोचिंग सेंटर और एनिमेशन सेंटर चल रहे थे। इस अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर 20 से 30 साल के छात्र थे। ज्यादातर मौतें दम घुटने की वजह से हुईं और 9 लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि इमारत में बाहर निकलने का सिर्फ एक छोटा रास्ता था, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि यह प्लॉट दिसंबर 2015 तक खाली था और फरवरी 2016 में इसका निर्माण शुरू हुआ। जून 2016 तक यह पूरी इमारत खड़ी हो गई, जो कि नियमों के खिलाफ था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2016 में इस अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने उस आदेश को रद्द कर दिया।
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर मौके का दौरा किया और घायलों से मुलाकात की। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दो सदस्यीय SIT का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों में रिपोर्ट देनी होगी। मंगलवार सुबह फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची थी।
| कार्रवाई का विवरण | विवरण/नाम |
|---|---|
| गिरफ्तार लोग | रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू |
| निलंबित अधिकारी | बिजली, अग्निशमन विभाग और LDA के 4 अधिकारी |
| SIT प्रमुख | अमृत अभिजात (अपर मुख्य सचिव) और प्रवीण कुमार (ADG लखनऊ जोन) |
| LDA की कार्रवाई | अवैध इमारत को गिराने का नोटिस जारी और 18 दोषियों की पहचान |
जांच में यह बात सामने आई है कि यह प्लॉट 1980 में सिर्फ रहने (आवासीय) के लिए दिया गया था, लेकिन यहां व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। अब इस हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने भी शहर के कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक केंद्रों में नियमों की जांच शुरू कर दी है।