Lucknow में भीषण अग्निकांड, 15 छात्रों की मौत; बिना इमरजेंसी गेट के बना था 3 मंजिला कॉम्प्लेक्स
Lucknow: अलीगंज इलाके में एक तीन मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर भीषण आग लग गई, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई। मरने वालों में ज्यादातर 20 से 24 साल के छात्र थे, जो पढ़ाई और नौकरी के लिए पश्चिम बंगाल, हरियाणा और मध्य प्रदेश
Lucknow: अलीगंज इलाके में एक तीन मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर भीषण आग लग गई, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई। मरने वालों में ज्यादातर 20 से 24 साल के छात्र थे, जो पढ़ाई और नौकरी के लिए पश्चिम बंगाल, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से लखनऊ आए थे। इस हादसे में 9 लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज KGMU के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है।
जांच में पता चला है कि यह इमारत रहने के लिए बनी थी, लेकिन यहां कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक काम चल रहे थे। सुरक्षा के नाम पर यहां कोई इमरजेंसी गेट नहीं था और बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही सीढ़ी थी। छत का रास्ता भी बंद था, जिसकी वजह से लोग फंस गए और बचाव कार्य में बहुत दिक्कत आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में इस तरह के सेंटर चलाना एक टाइम बम जैसा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना के बाद अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और घायलों से मुलाकात की। उन्होंने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय SIT का गठन किया है, जिसे सात दिन में रिपोर्ट देनी होगी। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीएम रिलीफ फंड से मृतकों के परिवार को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी है।
प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने इमारत के मालिकों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके नाम रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू हैं। इनके खिलाफ BNS और यूपी अग्नि सेवा अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। लापरवाही बरतने वाले चार अधिकारियों को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
| पद/अधिकारी | नाम | कार्रवाई |
|---|---|---|
| अधिशासी अभियंता (संग्रह) | गौरव कुमार | निलंबित |
| FSSO (इंदिरा नगर) | कमलेन्द्र कुमार सिंह | निलंबित |
| सहायक अभियंता | अनिल कुमार | निलंबित |
| जूनियर इंजीनियर | प्रमोद पांडे | निलंबित |
LDA ने इस इमारत को अवैध बताते हुए इसे गिराने का नोटिस जारी किया है। यह भी सामने आया कि 2016 में इसे गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो महीने बाद ही उसे रद्द कर दिया गया, जिस पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल SIT और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम मौके पर सबूत जुटा रही है।