Lucknow के सरस्वती विद्या मंदिर में आचार्य विकास वर्ग का दूसरा दिन, पंचपदी शिक्षण पद्धति पर हुई चर्चा

Lucknow: राजधानी के निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आचार्य विकास वर्ग का दूसरा दिन आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का मकसद शिक्षकों को आधुनिक और प्रभावी शिक्षण तरीकों से जोड़ना है। दूसरे दिन की शुरुआत योगाभ

Lucknow: राजधानी के निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आचार्य विकास वर्ग का दूसरा दिन आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का मकसद शिक्षकों को आधुनिक और प्रभावी शिक्षण तरीकों से जोड़ना है। दूसरे दिन की शुरुआत योगाभ्यास के साथ हुई, जिससे सभी प्रतिभागियों को मानसिक और शारीरिक ताजगी मिली।

वरिष्ठ आचार्य विनोद कुमार शुक्ल ने सभी उपस्थित शिक्षकों और प्रतिभागियों को योग का अभ्यास कराया। इसके बाद कार्यक्रम का मुख्य केंद्र ‘पंचपदी शिक्षण पद्धति’ रही, जिस पर गहन चर्चा की गई। यह पद्धति भारतीय शिक्षा दर्शन और मनोविज्ञान पर आधारित है और इसे पूरी तरह बाल-केंद्रित माना जाता है।

इस शिक्षण पद्धति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCF 2023) में भी काफी महत्व दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को रटने की आदत से दूर कर उन्हें सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय बनाना है। इससे बच्चों के ज्ञान, कौशल और रचनात्मकता के साथ-साथ उनमें समाज सेवा की भावना का भी विकास होता है।

पंचपदी पद्धति के तहत शिक्षण कार्य को पांच मुख्य चरणों में बांटा गया है:

  • प्रस्तावना (Introduction): विषय की शुरुआत करना।
  • संकल्पना की समझ (Conceptual Understanding): विषय को गहराई से समझना।
  • अभ्यास (Practice): सीखे हुए ज्ञान का अभ्यास करना।
  • उपयोग (Application): ज्ञान को व्यावहारिक जीवन में लागू करना।
  • विस्तार/प्रसार (Expansion/Dissemination): ज्ञान का दायरा बढ़ाना।

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान इस पद्धति को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। शिक्षकों को सलाह दी गई कि वे अनुभव और प्रयोग के जरिए बच्चों को पढ़ाएं ताकि छात्र विषय को रटने के बजाय उसे असलियत में समझ सकें। इससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास संभव हो पाएगा।