Lucknow में निकला 187 साल पुराना शाही मेहंदी जुलूस, हाथी-ऊंट और शाही अंदाज में दिखी परंपरा

Lucknow: नवाबों के शहर लखनऊ में मंगलवार रात 7वीं मुहर्रम के मौके पर 187 साल पुराना शाही मेहंदी जुलूस निकाला गया। यह पारंपरिक जुलूस हुसैनियाबाद ट्रस्ट के देखरेख में बड़ा इमामबाड़ा से शुरू होकर छोटा इमामबाड़ा पर खत्म हुआ।

Lucknow: नवाबों के शहर लखनऊ में मंगलवार रात 7वीं मुहर्रम के मौके पर 187 साल पुराना शाही मेहंदी जुलूस निकाला गया। यह पारंपरिक जुलूस हुसैनियाबाद ट्रस्ट के देखरेख में बड़ा इमामबाड़ा से शुरू होकर छोटा इमामबाड़ा पर खत्म हुआ। रात करीब 9 बजे शुरू हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और शहर में एक बार फिर पुरानी नवाबी संस्कृति की झलक दिखी।

यह खास जुलूस हजरत इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम की शादी की याद में निकाला जाता है। इस परंपरा की शुरुआत नवाब मोहम्मद अली शाह ने अपने शासनकाल (1837-42) के दौरान की थी, जबकि बाद में नवाब वाजिद अली शाह ने इसमें मेहंदी के गीत जुड़वाए। जुलूस में शाही बैनर, हाथी, घोड़े, ऊंट और मेहंदी की सजी हुई थालियां मुख्य आकर्षण रहे। साथ ही रौशन चौकी, बाजे, बैंड और जुलजनाह भी शामिल थे।

इस पूरे आयोजन का संरक्षण जिलाधिकारी और हुसैनियाबाद ट्रस्ट के अध्यक्ष ने किया। जुलूस के दौरान हुसैनियाबाद ट्रस्ट के सचिव और एडीएम पूर्वी महेंद्रपाल सिंह मौजूद रहे। रॉयल फैमिली के सदस्य मसूद अब्दुल्ला, जावेद, आसिफ और अफ्हाम-ए-जमा सोसाइटी के अध्यक्ष सैयद अली मीसम नकवी एडवोकेट समेत कई उलमा और लोग नौहाख्वानी करते हुए इसमें शामिल हुए।

भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही पुख्ता इंतजाम किए थे। डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित ने शाम 5 बजे से जुलूस खत्म होने तक के लिए ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया था। पुराने लखनऊ के 15 मुख्य रास्तों पर नो एंट्री लगाई गई थी ताकि आम जनता को परेशानी न हो। हालांकि, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और स्कूली वाहनों को जरूरत पड़ने पर छूट दी गई थी। मदद के लिए ट्रैफिक कंट्रोल नंबर 9454405155 भी जारी किया गया था।