Delhi-NCR, Haryana, Rajasthan और UP के कई इलाकों की मिट्टी में लेड (Lead) की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है। Toxics Link नाम की संस्था ने एक स्टडी की है जिसमें बताया गया है कि बैटरी रीसाइक्लिंग यूनिट्स के पास की जमीन काफी
Delhi-NCR, Haryana, Rajasthan और UP के कई इलाकों की मिट्टी में लेड (Lead) की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है। Toxics Link नाम की संस्था ने एक स्टडी की है जिसमें बताया गया है कि बैटरी रीसाइक्लिंग यूनिट्स के पास की जमीन काफी जहरीली हो चुकी है। यह प्रदूषण आम लोगों, खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
मिट्टी में कितना ज्यादा है प्रदूषण और क्या हैं नियम
स्टडी के दौरान 23 मिट्टी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 12 सैंपल में लेड की मात्रा 5,000 ppm से ज्यादा निकली। Environment Protection Rules 2025 के मुताबिक ऐसी जगहों को Hazardous Contaminated Sites माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी मान्यता प्राप्त (Authorized) रीसाइक्लिंग यूनिट्स के पास मिट्टी में प्रदूषण का स्तर ज्यादा पाया गया।
आम लोगों की सेहत पर क्या होगा असर
लेड एक ऐसा जहर है जो शरीर में धीरे-धीरे जमा होता रहता है। यह सांस के जरिए या दूषित धूल और खाने के जरिए शरीर में घुसता है। WHO ने इसे ग्रुप 2 कार्सिनोजेन की श्रेणी में रखा है। इसका सबसे बुरा असर बच्चों के दिमाग के विकास पर पड़ता है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता कम हो सकती है और व्यवहार में बदलाव आ सकता है। ज्यादा मात्रा में शरीर में जाने पर यह दौरे पड़ने या मौत का कारण भी बन सकता है।
प्रदूषण का डेटा और आर्थिक नुकसान
| विवरण |
जानकारी/आंकड़ा |
| प्रभावित क्षेत्र |
Delhi-NCR, Haryana, Rajasthan, UP |
| सैंपल्स की स्थिति |
52% सैंपल 5,000 ppm की सीमा से ऊपर |
| दिल्ली का ग्राउंड वाटर |
9.3% सैंपल में BIS लिमिट से ज्यादा लेड |
| वैश्विक मृत्यु दर |
सालाना लगभग 5.4 लाख मौतें |
| भारत को आर्थिक नुकसान |
सालाना 236 अरब डॉलर (लगभग 5% GDP) |